स्मार्ट मीटर या स्मार्ट चीटर?—यूपी में AAP का बिजली व्यवस्था पर बड़ा हल्ला, उठाये गंभीर सवाल

गोरखपुर: स्मार्ट मीटर को लेकर अब उत्तर प्रदेश में सियासत तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी ने सम्पूर्ण प्रदेश में जिला विद्युत उपकेंद्रों पर जोरदार प्रदर्शन करते हुए स्मार्ट मीटर योजना को “डिजिटल लूट” करार दिया है।

पार्टी कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपते हुए इस योजना की निष्पक्ष जांच और तत्काल रोक की मांग किया है।

इस प्रदर्शन के दौरान जिलाध्यक्ष विजय कुमार श्रीवास्तव ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ‘स्मार्ट मीटर’ अब ‘स्मार्ट चीटर’ बन चुके हैं।”

उन्होंने आरोप लगाते हुए बताया कि रिचार्ज के बाद भी घंटों बिजली बहाल नहीं होती, जिससे आम जनता को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

आज प्रदेश में लोगों के घरों में करीब 78–80 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं जिनमें अधिकांश प्रीपेड हैं। उपभोक्ताओं की शिकायत है कि जहां पहले ₹1500 तक बिल आता था,

वहीं अब ₹6000–7000 तक पहुंच रहा है। यह सीधे-सीधे जनता की जेब पर डाका है,”। AAP ने ₹20,000 करोड़ के स्मार्ट मीटर प्रोजेक्ट में बड़े घोटाले और कमीशनखोरी की आशंका भी जताई।

पार्टी का आरोप है कि मीटरों की कीमतों में भारी गड़बड़ी की गई और विरोध के बाद ही दरें कम की गईं, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।

किसानों की बढ़ी मुश्किलें-नलकूपों पर लगाए जा रहे 4G स्मार्ट मीटर भी किसानों के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं। नेटवर्क की दिक्कतों और बढ़े हुए बिजली बिलों से किसान खासे नाराज़ हैं। इससे सिंचाई व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।

जबरन मीटर लगाने का आरोप: AAP नेताओं का कहना है कि सरकार भले इसे वैकल्पिक बताती हो लेकिन जमीनी स्तर पर लोगों के घरों में जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं और बाद में उन्हें प्रीपेड में बदल दिया जाता है।

पार्टी की मुख्य मांगें क्या हैं?-स्मार्ट मीटर योजना पर तत्काल रोक, पूरे प्रोजेक्ट की स्वतंत्र जांच, दोषी अधिकारियों और कंपनियों पर कार्रवाई, रिचार्ज के बाद बिजली न मिलने पर मुआवजा,1912 हेल्पलाइन को प्रभावी बनाना

AAP ने चेतावनी दिया है कि अगर सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाए तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा और यह मुद्दा सड़क से लेकर सदन तक उठेगा।

कुल मिलाकर, स्मार्ट मीटर को लेकर प्रदेश में जनता की नाराज़गी अब सड़कों पर दिखाई देने लगी है जो आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक रूप ले सकता है।

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