गोरखपुर: अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर गोरखपुर में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद द्वारा डिप्लोमा इंजीनियर संघ भवन में एक प्रभावशाली कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम में मजदूरों के अधिकार, सम्मान और वर्तमान चुनौतियों को लेकर जोरदार आवाज उठाई गई।
वक्ताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “देश का सबसे बड़ा इंजीनियर मजदूर होता है”
यदि मजदूर खुश नहीं है तो देश कभी समृद्ध नहीं हो सकता। रुपेश और मदन मुरारी के इन विचारों ने पूरे कार्यक्रम का केंद्र बिंदु तय कर दिया।
राम समुझ शर्मा, अनूप श्रीवास्तव और सौरभ श्रीवास्तव ने संयुक्त रूप से कहा कि मजदूर किसी भी राष्ट्र की विकास यात्रा की रीढ़ होता है।
चाहे ऊंची-ऊंची इमारतें हों या सड़कों का विशाल नेटवर्क—हर निर्माण के पीछे मजदूरों का पसीना और परिश्रम छिपा होता है।
लेकिन उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि विडंबना यह है कि जो मजदूर देश को बनाता है, वही आज बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है।
बढ़ती महंगाई के बावजूद आज भी बड़ी संख्या में मजदूरों को उनकी मेहनत के अनुरूप उचित पारिश्रमिक नहीं मिल पा रहा है।
यहाँ तक कि असंगठित क्षेत्र के मजदूर आज भी पेंशन, बीमा और सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। किसी दुर्घटना या बीमारी की स्थिति में उनका पूरा परिवार आर्थिक संकट में डूब जाता है।
कार्यक्रम में यह संदेश जोरदार तरीके से दिया गया कि सिर्फ एक दिन मजदूर दिवस मनाने से हालात नहीं बदलेंगे। असली बदलाव तब आएगा जब मजदूरों को उचित मजदूरी,
सुरक्षित कार्यस्थल और सम्मानजनक जीवन का अधिकार वास्तव में मिलेगा और वह भी जमीनी स्तर पर लागू हो। इस अवसर पर बंटी श्रीवास्तव, इजहार अली, निसार अहमद और रामधनी पासवान सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।


