गोरखपुर: भाकपा (माले) गोरखपुर ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को छात्र-युवा आंदोलन की ऐतिहासिक जीत तथा लोकतांत्रिक जनसंघर्षों की ताकत का प्रमाण बताया है।
पार्टी ने कहा कि छात्रों-युवाओं पर दमन करने वाली केंद्र सरकार को अंततः संगठित जनदबाव के आगे झुकना पड़ा। किसान आंदोलन के बाद यह जन आंदोलन की एक और महत्वपूर्ण जीत है,
जिसने साबित कर दिया कि व्यापक, शांतिपूर्ण और दृढ़ जनसंघर्ष सबसे ताकतवर सरकारों को भी अपने फैसले बदलने के लिए मजबूर कर सकते हैं।
भाकपा (माले) गोरखपुर के जिला सचिव राकेश सिंह ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उस सत्ता के अहंकार पर करारा प्रहार है, जिसने छात्रों पर लाठीचार्ज कराया,
आंसू गैस और पैलेट गन का इस्तेमाल किया तथा आंदोलनकारी छात्रों-युवाओं को बदनाम करने की कोशिश की। आज उसी सरकार को छात्र-युवा आंदोलन के दबाव के आगे झुकना पड़ा है।
उन्होंने कहा कि यह जीत 36 दिनों तक चले अडिग छात्र-युवा आंदोलन, तीन सप्ताह से अधिक चली ऐतिहासिक भूख हड़ताल तथा देशभर में फैले व्यापक जनसमर्थन का परिणाम है।
छात्राओं की उल्लेखनीय भागीदारी ने इस आंदोलन को और अधिक व्यापक, लोकतांत्रिक तथा प्रेरणादायी बनाया। यह जीत बताती है कि संगठित युवा शक्ति लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।
इस संघर्ष को सफल बनाने वाले सभी छात्र-युवाओं तथा लोकतंत्रपसंद नागरिकों को भाकपा (माले) हार्दिक बधाई और लाल सलाम देती है।
राकेश सिंह ने कहा कि आंदोलन की प्रमुख मांगों—केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, आंदोलनकारी छात्रों पर दर्ज दमनात्मक कार्रवाइयों की वापसी तथा नीट पेपर लीक के बाद
आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा—पर सरकार को झुकना पड़ा है। लेकिन संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है।
20 जुलाई के संसद मार्च पर हुए दमन के जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को भंग कर पारदर्शी एवं जवाबदेह परीक्षा व्यवस्था लागू करना तथा
नई शिक्षा नीति-2020 को वापस लेने सहित शेष मांगों पर भी सरकार को ठोस निर्णय लेना होगा। इन्हीं मांगों की पूर्ति के साथ यह संघर्ष अपनी पूर्ण मंजिल तक पहुंचेगा।


