अमित शाह और राहुल गांधी SIR पर हुई बहस के दौरान लोकसभा में आमने-सामने: तीखी नोकझोंक और चुनौती का दौर

अमित शाह और राहुल गांधी SIR पर हुई बहस अमित शाह और राहुल गांधी SIR पर हुई बहस

अमित शाह और राहुल गांधी SIR पर हुई बहस: संसद के शीतकालीन सत्र के आठवें दिन लोकसभा में चुनाव सुधारों और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर चर्चा के दौरान एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखा टकराव देखने को मिला। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बीच बहस इतनी गरम हो गई कि दोनों आमने-सामने आ गए। राहुल गांधी ने अमित शाह को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर खुली बहस की चुनौती दे दी, जबकि शाह ने साफ लहजे में कहा, “आपके हिसाब से संसद नहीं चलेगी।” इस घटना ने संसदीय कार्यवाही को हंगामेदार बना दिया और विपक्ष ने ‘वोट चोरी’ के आरोपों को दोहराया।

SIR क्या है और क्यों है विवादास्पद?

SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन, मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा का एक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य फर्जी वोटरों को हटाना और चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है। विपक्ष का आरोप है कि SIR के बहाने खासकर बिहार, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में विपक्ष समर्थक वोटरों के नाम बड़े पैमाने पर काटे जा रहे हैं। राहुल गांधी ने इसे ‘वोट चोरी’ करार देते हुए कहा कि यह लोकतंत्र पर सीधा हमला है। वहीं, सरकार का कहना है कि यह चुनाव आयोग की स्वतंत्र प्रक्रिया है और विपक्ष झूठ फैला रहा है।

इस साल की शुरुआत में राहुल गांधी ने कर्नाटक, महाराष्ट्र और हरियाणा चुनावों में कथित धांधली के उदाहरण देते हुए तीन प्रेस कॉन्फ्रेंस कीं। उन्होंने दावा किया कि कुछ मतदाताओं ने एक ही चुनाव में कई जगह वोट डाले, जो चुनाव आयोग की मिलीभगत से संभव हुआ।

लोकसभा में क्या हुआ: बहस का पूरा घटनाक्रम

बुधवार को लोकसभा में चुनाव सुधारों पर बहस चल रही थी। गृह मंत्री अमित शाह सदन को संबोधित कर रहे थे और उन्होंने विपक्ष पर चार महीनों से SIR को लेकर ‘एकतरफा झूठ’ फैलाने का आरोप लगाया। शाह ने कहा, “चुनाव आयोग सरकार के अधीन नहीं है। SIR पर संसद में चर्चा नहीं हो सकती, लेकिन हम चुनाव सुधारों पर तैयार हैं।” उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या अवैध घुसपैठिए देश के चुनाव तय करेंगे कि प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री कौन बनेगा?

इसी बीच राहुल गांधी अपनी सीट से उठे और शाह के भाषण को बीच में टोक दिया। राहुल ने कहा, “मेरी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर बहस करें। मैं आपको चुनौती देता हूं। हरियाणा में 19 लाख फर्जी वोटर हैं, उत्तर प्रदेश में एक ही व्यक्ति ने दो जगह वोट डाला। यह वोट चोरी है, लोकतंत्र का गला घोंटना है।” राहुल ने RSS पर भी निशाना साधा कि वह सभी संस्थानों पर कब्जा करना चाहता है, जिसमें चुनाव आयोग भी शामिल है।

इस पर अमित शाह भड़क गए। उन्होंने तुरंत जवाब दिया, “मैं 30 साल से संसद और विधानसभा में हूं। मेरे बोलने का क्रम मैं तय करूंगा, आप नहीं। इस तरह संसद नहीं चलेगी। आपकी हर बात का जवाब दूंगा, लेकिन क्रम मेरा।”

शाह ने कांग्रेस के इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि पिछली अधिकांश SIR कांग्रेस शासनकाल में ही हुईं,

फिर विपक्ष अब क्यों नाराज है?

राहुल ने पलटवार करते हुए शाह के रवैये को ‘डरा और घबराया हुआ’ बताया।

उन्होंने कहा, “यह सही जवाब नहीं है।

सरकार असली मुद्दों से बच रही है।” इस टकराव के बाद सदन में जोरदार हंगामा मच गया।

विपक्ष के सांसद नारेबाजी करने लगे,

जबकि सत्ता पक्ष ने तालियां बजाईं। स्पीकर ने सदन को 10 मिनट के लिए स्थगित कर दिया।

विपक्ष और सत्ता पक्ष के अन्य नेताओं की प्रतिक्रियाएं

  • अखिलेश यादव (समाजवादी पार्टी): उन्होंने SIR को ‘वोटरों का सफाया’ बताया और कहा कि बिहार में गरीब और अल्पसंख्यक वोटरों को निशाना बनाया जा रहा है।
  • निशिकांत दुबे (बीजेपी): राहुल के RSS वाले बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह संवैधानिक संस्थाओं को धमकाना है।
  • किरेन रिजिजू (संसदीय कार्य मंत्री): उन्होंने राहुल को विषय से भटकने का आरोप लगाया और कहा कि विपक्ष अहंकार से भरा बयान दे रहा है।
  • जेपी नड्डा (बीजेपी अध्यक्ष): राज्यसभा में वंदे मातरम पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी के आरोपों पर पलटवार किया।

इस बहस में कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी और संबित पात्रा की ओर से बीजेपी ने हिस्सा लिया।

विपक्ष का कहना है कि यह बहस लोकतंत्र बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण है,

जबकि सरकार इसे ‘फर्जी नैरेटिव’ बता रही है।

क्या होगा आगे?

अमित शाह बुधवार शाम को ही बहस का समापन करेंगे। संसदीय कार्य मंत्री किरेन

रिजिजू ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी।

विपक्ष SIR पर अलग से चर्चा की मांग कर रहा है, लेकिन सरकार चुनाव सुधारों तक सीमित रखना चाहती है।

राज्यसभा में वंदे मातरम पर चर्चा के कारण कार्यवाही प्रभावित रही।

यह घटना संसद के शीतकालीन सत्र को और रोचक बना रही है,

जहां विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश में जुटा है।

क्या यह टकराव चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े करेगा? आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं।

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