गोरखपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र स्थित गोविंद नगरी से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय के प्रशासन और कुलपति पर
गंभीर आरोप लगाते हुए पूर्वांचल गाँधी डॉ मल्ल ने एक विस्तृत ज्ञापन राज्यपाल, जिलाधिकारी, मुख्यमंत्री और उच्च अधिकारियों को भेजा है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि विश्वविद्यालय का प्रशासन पूरी तरह “क्रिमिनलाइज्ड सिस्टम” में बदल चुका है, जहां योग्य लोगों को बाहर कर अयोग्य और नियम विरुद्ध नियुक्तियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
इनका दावा है कि यूजीसी नेट, जेआरएफ और शोध योग्यता होने के बावजूद उनकी मानदेय प्रवक्ता नियुक्ति को 2008 में रद्द कर दिया गया।
ज्ञापन में विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि विश्वविद्यालय को “RSS और ABVP की नर्सरी” बनाया जा रहा है तथा विश्वविद्यालय परिसर में वैचारिक कार्यक्रमों और धार्मिक आयोजनों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
इसके साथ ही दो छात्रों की मौत का मामला उठाते हुए प्रशासन पर सवाल खड़े किए गए हैं। ज्ञापन में कहा गया कि इंटरनल एग्जाम में कम अंक दिए जाने और कथित मानसिक प्रताड़ना के कारण छात्रों ने आत्महत्या जैसे कदम उठाए।
इन मामलों में कुलपति पर जिम्मेदारी तय करते हुए हत्याभियोग दर्ज करने और बर्खास्तगी की मांग की गई है। पीएचडी फीस में भारी बढ़ोतरी को लेकर भी ज्ञापन में पूर्वांचल गाँधी ने
तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि गरीब, किसान, मजदूर और शिल्पकार परिवारों के बच्चों को उच्च शिक्षा और रिसर्च से दूर किया जा रहा है।
इसके अलावा फर्जी पीएचडी, नियम विरुद्ध नियुक्तियों, प्रमोशन में यूजीसी रेगुलेशन की अनदेखी और प्लेगिरिज्म जैसे मुद्दों की CBI या उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग उठाई गई है।
इन्होंने चेतावनी दी गई है कि 5 जून को लखनऊ के हजरतगंज में “शौर्य सत्य समृद्धि का तिरंगा” उठाकर पूरे सिस्टम की सच्चाई जनता के सामने रखी जाएगी।
अब सवाल यह उठ रहा है कि इतने गंभीर आरोपों के बाद क्या सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन कोई बड़ा कदम उठाएगा या मामला सिर्फ ज्ञापन तक ही सीमित रह जाएगा?


