बुलंदशहर, 13 मार्च 2026: उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के खुर्जा कोतवाली क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। नेहरूपुर गांव के पास रेलवे ट्रैक किनारे जंगल में एक ही परिवार के तीन सदस्यों के शव मिले हैं। मृतकों में एक महिला (भाभी), उसका देवर (युवक) और उसकी 5 साल की मासूम भतीजी शामिल हैं। महिला का शव पेड़ से फांसी के फंदे पर लटका मिला, जबकि युवक और बच्ची के शव जमीन पर पड़े थे। पुलिस ने घटना को गंभीरता से लेते हुए हत्या और आत्महत्या दोनों एंगल से जांच शुरू कर दी है।
शुक्रवार सुबह स्थानीय ग्रामीणों को जंगल में शव दिखाई दिए, जिसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही खुर्जा कोतवाली पुलिस, फॉरेंसिक टीम और एसडीएम मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि मृत युवक की पहचान सरल (28 वर्ष) के रूप में हुई है, जो पश्चिम बंगाल का मूल निवासी था। महिला का नाम सावित्री या संबंधित बताया जा रहा है, जबकि बच्ची की पहचान सावंती (5 वर्ष) के रूप में हुई।
यह परिवार खुर्जा देहात क्षेत्र में किराए के मकान में रहता था और पॉटरी इंडस्ट्री (मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कारखाने) में मजदूरी करता था। वे प्रवासी मजदूर थे और लंबे समय से यहां काम कर रहे थे। घटनास्थल पर फॉरेंसिक टीम ने गहन जांच की, जिसमें फिंगरप्रिंट, फुटप्रिंट और अन्य सबूत जुटाए गए। पुलिस का कहना है कि महिला की मौत फांसी से हुई प्रतीत होती है, लेकिन युवक और बच्ची के शवों पर चोट के निशान या अन्य संकेतों की जांच की जा रही है।
पुलिस जांच के प्रमुख बिंदु
- क्या यह सामूहिक आत्महत्या थी या हत्या के बाद फांसी का नजारा बनाया गया?
- परिवार में कोई पारिवारिक विवाद, आर्थिक तंगी या मानसिक तनाव की स्थिति थी?
- आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है, क्योंकि घटना रात में हुई मानी जा रही है।
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है, जो मौत का सटीक कारण बताएगी।
घटना ने स्थानीय लोगों में दहशत फैला दी है। कई लोग इसे पारिवारिक विवाद से जोड़ रहे हैं, जबकि कुछ इसे आत्महत्या का मामला मान रहे हैं। पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल लोकेशन की जांच भी शुरू कर दी है।
प्रवासी मजदूरों की चुनौतियां
यह घटना उत्तर प्रदेश में प्रवासी मजदूरों की जिंदगी की कड़वी हकीकत को
उजागर करती है। पॉटरी इंडस्ट्री जैसे छोटे कारखानों में
काम करने वाले मजदूर अक्सर आर्थिक दबाव, पारिवारिक अलगाव और मानसिक तनाव का शिकार होते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में समय पर काउंसलिंग और सामाजिक सहायता जरूरी है।
पुलिस अधीक्षक ने कहा कि जांच पूरी होने तक कोई भी निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
मामले की गहराई से छानबीन की जा रही है और जल्द ही सच्चाई सामने आएगी।
यह हृदय विदारक घटना पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है।
परिवार के अन्य सदस्यों से संपर्क साधा जा रहा है।


