उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हिंदू धर्म और संतों से जुड़े मुद्दे पर तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े विवाद ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को आमने-सामने ला दिया है। सोमवार को वाराणसी में सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने शंकराचार्य को “भगवान” बताते हुए उनका खुलकर समर्थन किया, जबकि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर “ढोंगी” होने का आरोप लगाया।
केशव प्रसाद मौर्य का बड़ा बयान: शंकराचार्य भगवान हैं, स्वागत करेंगे
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “जगद्गुरू शंकराचार्य भगवान हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ढोंगी हैं। शंकराचार्य जहां भी जाएंगे, हम रामभक्त होने के नाते उनका स्वागत करेंगे।” उन्होंने आगे कहा कि हिंदू धर्म में शंकराचार्य का स्थान सर्वोच्च है। केशव मौर्य ने यह बयान ऐसे समय दिया जब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े कुछ मुद्दों पर राजनीतिक बहस छिड़ी हुई है।
डिप्टी सीएम ने राम भक्तों की भावनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि शंकराचार्य महाराज का सम्मान करना हर रामभक्त का फर्ज है। यदि वे लखनऊ या कहीं भी आते हैं, तो उनका स्वागत किया जाएगा। यह बयान बीजेपी के भीतर से शंकराचार्य के प्रति सम्मान की भावना को दर्शाता है, जबकि विपक्षी दलों पर तंज कसता है।
अखिलेश यादव पर सीधा हमला: ढोंगी करार दिया
केशव प्रसाद मौर्य ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव को “ढोंगी” बताते हुए उन पर निशाना साधा। उनका कहना था कि अखिलेश यादव ढोंगी व्यक्ति हैं, जो राम भक्तों, कृष्ण भक्तों और शिव भक्तों पर अत्याचार करते हैं और मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करते हैं। यह बयान शंकराचार्य मुद्दे पर अखिलेश के पिछले बयानों के जवाब में आया है, जहां उन्होंने सरकार पर संतों के अपमान का आरोप लगाया था।
यह विवाद उत्तर प्रदेश की सियासत को गरमा रहा है, क्योंकि शंकराचार्य जैसे सर्वोच्च धार्मिक पद पर बैठे संत का सम्मान सभी पार्टियों के लिए संवेदनशील मुद्दा है। केशव मौर्य के बयान से साफ है कि बीजेपी शंकराचार्य के प्रति अपनी निष्ठा दिखा रही है, जबकि सपा पर पलटवार कर रही है।
शंकराचार्य विवाद का राजनीतिक महत्व
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ा यह मुद्दा माघ मेले, स्नान और अन्य धार्मिक घटनाओं से जुड़ा रहा है।
विपक्ष इसे सरकार के खिलाफ इस्तेमाल कर रहा है,
लेकिन केशव प्रसाद मौर्य जैसे नेता इसे धार्मिक सम्मान का सवाल बनाकर पेश कर रहे हैं।
हिंदू धर्म में शंकराचार्य को जगद्गुरु माना जाता है, और
उनका अपमान या सम्मान दोनों ही राजनीतिक दलों के लिए वोट बैंक से जुड़ा है।
यह आमने-सामने की लड़ाई 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले ब्राह्मण और हिंदू वोटरों को
साधने की कोशिश लगती है। केशव मौर्य का शंकराचार्य को “भगवान”
कहना और स्वागत का वादा बीजेपी की हिंदुत्व वाली इमेज को मजबूत करता है।
वहीं, अखिलेश यादव पर “ढोंगी” का आरोप सपा की छवि पर सवाल उठाता है।
निष्कर्ष: धर्म और राजनीति का मेल
उत्तर प्रदेश में धर्म और राजनीति हमेशा करीब-करीब रहते हैं। शंकराचार्य मुद्दे पर
केशव प्रसाद मौर्य और अखिलेश यादव के बयान इसकी ताजा मिसाल हैं।
डिप्टी सीएम ने साफ कर दिया कि शंकराचार्य उनके लिए भगवान हैं और
उनका सम्मान सर्वोपरि है। यह बयान न केवल धार्मिक भावनाओं को छूता है,
बल्कि राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।
क्या यह विवाद और तेज होगा या शांत हो जाएगा? समय बताएगा, लेकिन फिलहाल यूपी की सियासत में गरमी बनी हुई है।


