गोरखपुर। सिख धर्म के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी के 359वें प्रकाश दिवस पर गोरखपुर के मोहद्दीपुर गुरुद्वारा से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। यह शोभायात्रा श्रद्धा, उत्साह और एकता की अनुपम मिसाल बनी। 5 जनवरी 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम में हजारों सिख संगत ने भाग लिया। शोभायात्रा में गतका करतब, निशान साहिब और पंज प्यारे की झांकी मुख्य आकर्षण रहे।
प्रकाश दिवस गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्मदिन है, जो सिख इतिहास में महत्वपूर्ण है। उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की और सिखों को शस्त्र धारण करने का आदेश दिया। गोरखपुर में मोहद्दीपुर गुरुद्वारा प्रमुख केंद्र है। शोभायात्रा सुबह गुरुद्वारे से शुरू हुई और शहर के मुख्य मार्गों से गुजरी। संगत ने “जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल” के जयकारे लगाए।
शोभायात्रा में युवाओं ने गतका (सिख मार्शल आर्ट) के करतब दिखाए। तलवारबाजी और लाठी खेल से लोगों का मन मोह लिया। पंज प्यारे आगे-आगे चल रहे थे। निशान साहिब लहरा रहे थे। बच्चों और महिलाओं ने फूल बरसाए। बैंड बाजे और कीर्तन का माहौल था। गुरुद्वारे में लंगर का आयोजन हुआ, जहां सभी ने प्रसाद ग्रहण किया।
यह शोभायात्रा गुरु गोबिंद सिंह जी के सिद्धांतों – शौर्य, सेवा और समानता – को जीवंत करती है। संगत ने कहा कि गुरु जी ने सिखों को निर्भय बनाया। प्रकाश दिवस पर उनके बलिदान और शिक्षाओं को याद किया जाता है। गोरखपुर में सिख समुदाय का उत्साह देखते बनता था।
प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। ट्रैफिक डायवर्जन था। शोभायात्रा शांतिपूर्ण रही। गुरुद्वारे में अखंड पाठ और कीर्तन हुआ। शाम को आतिशबाजी और प्रकाश व्यवस्था से गुरुद्वारा चमक उठा।
यह दिवस सिख इतिहास का महत्वपूर्ण पर्व है। गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ बनाकर सिखों को नई पहचान दी। मोहद्दीपुर शोभायात्रा शहर की एकता दिखाती है। सभी धर्मों के लोग शामिल हुए।
शोभायात्रा हाइलाइट्स: गतका और झांकी
हाइलाइट्स:
- गतका करतब।
- पंज प्यारे।
- निशान साहिब।
- कीर्तन।
- फूल बरसाव।
- बैंड बाजा।
- लंगर।
रौनक देखते बनती।
गुरु जी महत्व: खालसा पंथ
महत्व:
- दसवें गुरु।
- खालसा स्थापना।
- शौर्य।
- सेवा।
- समानता।
- बलिदान।
- शिक्षाएं।
विरासत अमर।
संगत उत्साह: एकता
संगत:
- हजारों।
- जयकारे।
- श्रद्धा।
- एकता।
- सभी धर्म।
- उत्साह।
- भक्ति।


