गया में पहली बार शहीदों का पिंडदान! रघुबंश हिन्दू ने निभाई अनूठी परंपरा, बोले—‘ये वीर हमारे राष्ट्रीय पितृ हैं’

Gorakhpur Halchal

गया। पितृ पक्ष में जहां देशभर में लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और पिंडदान कर रहे हैं, वहीं बिहार के गया में राष्ट्र के ज्ञात-अज्ञात शहीदों के सम्मान में एक अनूठी पहल सामने आई। रघुबंश हिन्दू के नेतृत्व में देश के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए पिंडदान कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस दौरान नेताजी सुभाष चंद्र बोस, शहीद-ए-आजम भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद समेत देश की स्वतंत्रता और राष्ट्र की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले ज्ञात-अज्ञात वीरों को श्रद्धापूर्वक याद किया गया। आयोजकों के अनुसार, बनारस के पिशाचमोचन और गया में हिन्दू परंपरा के अनुसार शहीदों का पिंडदान किया गया। कार्यक्रम के साथ श्रीमद्भागवत कथा और शहीद कथा का भी आयोजन हुआ।
‘शहीद भी हमारे राष्ट्रीय पितृ हैं’
रघुबंश हिन्दू ने कहा कि हम अपने पितरों का तर्पण करते हैं, लेकिन जिन वीरों ने राष्ट्र और आने वाली पीढ़ियों के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया, वे भी हमारे राष्ट्रीय पितृ हैं। पितृ पक्ष में उनका स्मरण और सम्मान करना देश के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक माध्यम है।
उन्होंने कहा कि शहीदों को केवल राष्ट्रीय पर्वों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उनके बलिदान को धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना से जोड़ना जरूरी है। इसी उद्देश्य से पितृ पक्ष में शहीदों का पिंडदान करने की पहल की गई।

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि देश के लिए बलिदान देने वाले वीरों की स्मृति को जीवित रखना केवल सरकार या किसी संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है।

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