126 दीपों से रोशन हुई अमर बलिदानी अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ की स्मृति, गोरखपुर में गूंजा राष्ट्रभक्ति और हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश

Gorakhpur Halchal

गोरखपुर। देश की आजादी के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूमने वाले अमर क्रांतिकारी अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ की 126वीं जयंती पर गोरखपुर में उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

शहीद अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ प्राणी उद्यान में 126 दीप प्रज्वलित कर उनके अदम्य साहस, राष्ट्रप्रेम और सर्वोच्च बलिदान को याद किया गया। दीपों की रोशनी के बीच देशभक्ति, सामाजिक समरसता और हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी गोरखपुर क्षेत्र के क्षेत्रीय मंत्री एवं काकोरी बलिदान शताब्दी वर्ष स्मृति महोत्सव आयोजन समिति के संयोजक बृजेश राम त्रिपाठी ने

अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ और पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की मित्रता सिखाती है कि राष्ट्र से बढ़कर कुछ भी नहीं है।

दोनों क्रांतिकारियों ने व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर देश की स्वतंत्रता, सम्मान और अखंडता के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उनकी दोस्ती भारतीय इतिहास में राष्ट्रभक्ति और आपसी भाईचारे की अनुपम मिसाल है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्राणी उद्यान के निदेशक सूरज ने कहा कि अशफ़ाक़-बिस्मिल की मित्रता भारतीय इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है।

यह आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रभक्ति, सामाजिक समरसता और हिंदू-मुस्लिम एकता की प्रेरणा देती रहेगी। मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए दोनों क्रांतिकारियों का सर्वोच्च बलिदान आज भी प्रत्येक भारतीय के हृदय में देशप्रेम की भावना जागृत करता है।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता, स्वाभिमान और राष्ट्र की गरिमा के लिए संघर्ष करने वाले वीरों के विचार कभी समाप्त नहीं होते। उनका बलिदान सदैव देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा।

22 अक्टूबर 1900 को उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में जन्मे अशफाक उल्ला बचपन से ही उनके मन में देशप्रेम, अन्याय के विरुद्ध संघर्ष और भारत को स्वतंत्र कराने की प्रबल आकांक्षा थी।

अंग्रेजी हुकूमत की दमनकारी नीतियों के खिलाफ उन्होंने क्रांतिकारी आंदोलन का रास्ता चुना और अपना जीवन मातृभूमि के लिए समर्पित कर दिया।

प्राणी उद्यान में आयोजित दीप प्रज्वलन कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि का आयोजन नहीं, बल्कि देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले क्रांतिकारियों के आदर्शों को याद करने का अवसर भी बना।

126 दीपों के माध्यम से उनके त्याग, साहस और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण को नमन किया गया।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से क्षेत्रीय वन अधिकारी गौरव वर्मा,

डॉ. रवि यादव, वन दारोगा अभिषेक राय, राखी सिंह, वन रक्षक संजय कुशवाहा, सुमित यादव, धीरेंद्र प्रताप सिंह, अभिषेक त्रिपाठी, रीमा गुप्ता, महेश चंद्र दूबे, प्रदीप त्रिपाठी समेत प्राणी उद्यान के अनेक अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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