भाजपा समर्थकों का कहना है कि पार्टी की राजनीतिक ताकत का आधार जनता का विश्वास और कार्यकर्ताओं की मेहनत है।
उनके मुताबिक, भाजपा को मिलने वाला समर्थन किसी कथित वोट चोरी की वजह से नहीं, बल्कि जनता के भरोसे का परिणाम है।
रैली के दौरान भाजपा के झंडे, नारे और बड़ी संख्या में जुटे समर्थकों ने पूरे आयोजन को राजनीतिक रूप से चर्चा में ला दिया।
पार्टी की ओर से लोकतंत्र की रक्षा और अराजकता के विरोध का संदेश दिया गया। अब इस रैली के बाद राजनीतिक गलियारों में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर चर्चाएं तेज हो सकती हैं।
हालांकि, किसी भी रैली में जुटी भीड़ को सीधे चुनावी नतीजों का संकेत मानना उचित नहीं होगा। वास्तविक जनसमर्थन का आकलन चुनाव के दौरान मतदाताओं के फैसले से ही होगा।
फिलहाल गोरखपुर की इस रैली ने एक सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—2027 के चुनाव में पूर्वांचल की सियासत किस करवट बैठेगी?

