गोरखपुर। समाजवादी पार्टी में गोरखपुर को लेकर बड़ा संगठनात्मक फैसला सामने आया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गोरखपुर की जिला एवं नगर कार्यकारिणी के साथ-साथ सभी फ्रंटल संगठनों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है।
इस फैसले को आगामी चुनावों से पहले संगठन में बड़े बदलाव और अनुशासन कायम करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।
सपा के लिए मुश्किलें उस समय और बढ़ गईं, जब गोरखपुर प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान पार्टी नेताओं के बीच ही विवाद हो गया। देखते ही देखते मामला हाथापाई और थप्पड़बाजी तक पहुंच गया।
घटना का वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में भी इसकी चर्चा तेज हो गई। मामले में कैंट थाने में संबंधित नेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने की बात भी सामने आई है।
पार्टी के भीतर जमीन से जुड़े विवादों, कथित अवैध कब्जे और फर्जी बैनामे जैसे आरोपों को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
हालांकि इन आरोपों की सत्यता का निर्धारण संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही होगा, लेकिन ऐसे विवादों ने पार्टी की सार्वजनिक छवि को लेकर नेतृत्व के सामने चुनौती जरूर खड़ी की है।
गोरखपुर में संगठन की पूरी इकाई को भंग करने के फैसले को सपा नेतृत्व की बड़ी संगठनात्मक कार्रवाई माना जा रहा है। अब नए सिरे से संगठन खड़ा करने की कवायद के बीच सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को एकजुट कर अनुशासन कायम किया जाए और जनता के बीच राजनीतिक भरोसा मजबूत किया जाए।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल—सपा में आगे क्या?
कार्यकारिणी भंग होने के बाद अब निगाहें नए संगठनात्मक गठन पर टिक गई हैं। कौन चेहरे नई जिम्मेदारी संभालेंगे और किन ताओं को संगठन में जगह मिलेगी, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।

