गोरखपुर। निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव की मांग को लेकर गुरुवार को गोरखपुर में अधिवक्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया है। प्रगतिशील अधिवक्ता समन्वय समिति, उत्तर प्रदेश गोरखपुर के
नेतृत्व में विभिन्न अधिवक्ता संगठनों से जुड़े लोगों ने दीवानी न्यायालय परिसर स्थित बार एसोसिएशन की गांधी प्रतिमा से मार्च निकाला। प्रदर्शनकारी अंबेडकर चौराहे से होते हुए मंडलायुक्त कार्यालय पहुंचे और अपनी मांगों के समर्थन में मंडलायुक्त को ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शन में अधिवक्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया रद्द करने, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित वर्ष 2023 के कानून को निरस्त करने और पुराने फॉर्म-6 को बहाल करने की मांग उठाई।
प्रदर्शन में अधिवक्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया रद्द करने, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित वर्ष 2023 के कानून को निरस्त करने और पुराने फॉर्म-6 को बहाल करने की मांग उठाई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार दोपहर करीब 2 बजे शुरू हुए इस मार्च में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य संगठनों से जुड़े अधिवक्ताओं ने भी भागीदारी की। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग करते हुए नारेबाजी की।
अधिवक्ताओं की प्रमुख मांगें थीं: 1.मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें।
2.एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया रद्द की जाए।
3.चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 का कानून निरस्त किया जाए।
4. पुराने फॉर्म-6 को पुनः बहाल किया जाए।
विरोध सभा का नेतृत्व प्रगतिशील अधिवक्ता समन्वय समिति के अध्यक्ष अधिवक्ता सुभाष पाल ने किया, जबकि संचालन अधिवक्ता कमल श्रीवास्तव ने किया।
सभा को संबोधित करते हुए अधिवक्ता रामकिंकर यादव ने आरोप लगाया कि सरकार ने कानून बनाकर मुख्य चुनाव आयुक्त को असीमित अधिकार दे दिए हैं, जिनका दुरुपयोग हो रहा है।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न होना जरूरी है। सभा में मौजूद अधिवक्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी और एसआईआर प्रक्रिया को रद्द करने की मांग का भी समर्थन किया।

