: जर्जर सड़क, कूड़े का अंबार और जिम्मेदारों की चुप्पी से श्रद्धालु व स्थानीय नागरिक परेशान
गोरखपुर: शहर की ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहर गुरुद्वारा जटाशंकर तक पहुंचने वाला मार्ग इन दिनों बदहाली का पर्याय बन गया है।
टूटी-फूटी सड़क, जगह-जगह गड्ढे, कूड़े के ढेर और अव्यवस्थित निर्माण कार्य ने श्रद्धालुओं एवं स्थानीय नागरिकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि कई बार शिकायतों और मांगों के बावजूद जिम्मेदार विभाग समस्या के समाधान को लेकर गंभीर नहीं दिखाई दे रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, विरासत गलियारा निर्माण कार्य शुरू होने के बाद से गुरुद्वारा जटाशंकर जाने वाले मार्ग की स्थिति लगातार खराब होती चली गई।
यह मार्ग न केवल गुरुद्वारा तक पहुंचने का प्रमुख रास्ता है, बल्कि आसपास के मोहल्लों और निकट स्थित शिव मंदिर के श्रद्धालुओं के लिए भी महत्वपूर्ण है।
प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों का यहां आवागमन होता है, लेकिन सड़क की दुर्दशा उनके लिए परेशानी का सबब बनी हुई है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि पहले से ही संकरी सड़क पर विद्युत विभाग द्वारा मुख्य प्रवेश द्वार के समीप बड़ा विद्युत पैनल स्थापित कर दिए जाने से मार्ग और अधिक संकरा हो गया है।
इससे वाहनों के आवागमन में दिक्कतें बढ़ गई हैं और दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है। इसके अलावा, जलापूर्ति और विद्युत लाइनों को भूमिगत करने के लिए सड़क खोदी गई, लेकिन कार्य पूरा होने के बाद सड़क को व्यवस्थित रूप से नहीं बनाया गया।
परिणामस्वरूप सड़क पर गड्ढे, उबड़-खाबड़ रास्ते और कीचड़ जैसी समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं। बरसात के मौसम में हालात और भी खराब होने की आशंका जताई जा रही है।
स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि बार-बार मांग उठाने के बावजूद न तो नियमित सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है और न ही सड़क की मरम्मत का कार्य शुरू हुआ है।
लोगों का कहना है कि धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व वाले इस स्थल तक पहुंचने वाले मार्ग की ऐसी स्थिति शहर की छवि को भी प्रभावित कर रही है।
क्षेत्रवासियों की प्रमुख मांगें: गुरुद्वारा जटाशंकर मार्ग की तत्काल मरम्मत कर सड़क को सुगम बनाया जाए।
मार्ग पर फैली गंदगी और कूड़े के ढेरों को हटाकर नियमित सफाई कराई जाए।
मुख्य प्रवेश द्वार के सामने लगाए गए विद्युत पैनल को उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित किया जाए। श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों के सुरक्षित एवं सुचारु आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गुरुद्वारा जटाशंकर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान भी है।
ऐसे में इसकी ओर जाने वाले मार्ग की बदहाल स्थिति पर प्रशासन को तत्काल संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए।
अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग लोगों की इस पीड़ा को कब तक सुनते हैं और समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाते हैं?


