जंगल कौड़िया/गोरखपुर: विकास खंड जंगल कौड़िया के ग्राम सभा मीरपुर में पंचायत भवन में हुई चोरी का मामला अब चर्चा का विषय बन गया है।
चोरी की घटना 30 अप्रैल, 2026 की बताई जा रही है, जबकि इसकी शिकायत 6 जून 2026 को थाने में दी गई। घटना और शिकायत के बीच करीब 37 दिनों की देरी ने ग्रामीणों के बीच कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार ग्राम प्रधान द्वारा थाना में प्रार्थना पत्र देकर पंचायत भवन से चोरी हुए सामान की शिकायत दर्ज कराई गई है। ग्रामीणों का दावा है कि चोरी हुए सामान की कीमत लाखों रुपये में हो सकती है।
हालांकि वास्तविक नुकसान का आकलन जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि चोरी 30 अप्रैल को हुई थी तो इसकी जानकारी प्रशासन और पुलिस को देने में इतना लंबा समय क्यों लगा?
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत भवन की देखरेख और नियमित निरीक्षण की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की होती है। ऐसे में क्या 37 दिनों तक किसी ने पंचायत भवन का निरीक्षण नहीं किया?
ग्रामीण यह भी पूछ रहे हैं कि ग्राम पंचायत स्तर पर नियुक्त कर्मियों ने इस दौरान पंचायत भवन की स्थिति की जानकारी क्यों नहीं ली। यदि समय रहते निरीक्षण किया गया होता तो घटना की जानकारी पहले सामने आ सकती थी।
मामले को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पंचायत भवन की सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी व्यवस्था और सूचना देने में हुई देरी की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि पंचायत भवन की नियमित निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी। हालांकि, किसी भी व्यक्ति या अधिकारी की जिम्मेदारी तय करना जांच का विषय है।
पुलिस और प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि चोरी की घटना कब और कैसे हुई तथा सूचना देने में हुई देरी के पीछे क्या कारण रहे।
ग्रामीणों के सवाल– 1. चोरी के 37 दिन बाद शिकायत क्यों? 2. क्या पंचायत भवन का नियमित निरीक्षण नहीं हो रहा था? 3. पंचायत कर्मियों और संबंधित अधिकारियों की क्या जिम्मेदारी थी? 4. लाखों के सामान की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम थे?
अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं कि आखिर पंचायत भवन में हुई इस चोरी और सूचना में हुई देरी का सच क्या है?


