हजरत मुबारक खान शहीद का सलाना उर्स: ऐसे सूफी संत जिनसे अंग्रेज भी खौफ खाते थे

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में नार्मल टैक्सी स्टैंड के पास स्थित हजरत मुबारक खान शहीद (रह.) की दरगाह न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल भी है।

सदियों से यहाँ हर मजहब के लोग अपनी मुरादें लेकर आते हैं। हजरत मुबारक खान शहीद का इतिहास वीरता और सूफीवाद का संगम है।

कहा जाता है कि वह एक महान योद्धा और अल्लाह के वली थे, जिन्होंने हक की राह में अपनी शहादत दे दी। गोरखपुर के बीचों-बीच स्थित यह दरगाह शहर की पहचान बन चुकी है।

ऐसा बताया जाता है कि दरगाह सुकून की तलाश है? तो एक बार गोरखपुर की इस पाक दरगाह की जियारत जरूर करें। हजरत मुबारक खान शहीद के दर पर जो भी आता है, खाली हाथ नहीं जाता।

सरकारी चादर पेश करने के दौरान अलग-अलग जगह से जुलूस की शक्ल में लोग दरगाह तक पहुंचाते हैं और चादर पेश करके अपनी मन्नतें मांगते हैं।

आज उर्स ए पाक के मुबारक मौके पर सुल्तान खान चौराहा तुर्कमानपुर से घोड़े और ऊंट की सवारी पर सवार होकर बड़ी संख्या में लोगों की

इस मौके पर उमर अहमद गोलू, सद्दाम, अमर जायसवाल, अर्शालन खां आशु, आशिफ खां, साकिब हाशमी, हमजा खान, नुरुल हुदा, शमशेर अली, अजीज सिद्दीकी सहित अनेक युवा जुलूस में शामिल होकर मोहब्बत का पैगाम दिया।

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