गोरखपुर, 24 फरवरी 2026: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर के साथ 22 फरवरी की रात को बेहद शर्मनाक और खौफनाक उत्पीड़न का मामला सामने आया है। नागालैंड की रहने वाली यह डॉक्टर एम्स गोरखपुर के स्त्री एवं प्रसूति रोग (OBGYN) विभाग में परास्नातक तृतीय वर्ष की छात्रा हैं। घटना मोहद्दीपुर स्थित ओरियन मॉल से एम्स गेट नंबर 2 तक करीब 1.5 किलोमीटर की दूरी तक हुई, जहां तीन युवकों ने उनका पीछा किया, नस्लीय टिप्पणियां कीं, अश्लील कमेंट्स किए और अंत में बैड टच (अनुचित शारीरिक छेड़छाड़) किया। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि तीसरे की तलाश में चार टीमें लगी हुई हैं।
घटना का पूरा विवरण
22 फरवरी की शाम करीब 8 बजे डॉक्टर ओरियन मॉल से बाहर निकलीं। तभी तीन युवक (बाइक सवार) उनके पीछे लग गए। उन्होंने उन्हें घूरना शुरू किया, हंसी-ठिठोली की और उत्तर-पूर्वी राज्य (नॉर्थईस्ट) से होने के कारण नस्लीय भेदभावपूर्ण टिप्पणियां कीं। जैसे “चाइनीज”, “नेपाल वाली” आदि स्टीरियोटाइप कमेंट्स किए। रास्ते भर वे अपशब्द बोलते रहे और डॉक्टर को असहज महसूस कराते रहे।
पीछा करीब 1.5 किलोमीटर तक जारी रहा। एम्स गेट नंबर 2 के पास पहुंचते ही एक आरोपी ने अपनी शर्ट उतारकर उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश की और अशोभनीय हरकतें कीं। इसके बाद दूसरे आरोपी ने बैड टच किया। डॉक्टर ने विरोध जताया और जोर-जोर से चिल्लाकर मदद मांगी। उनकी चीख सुनकर आरोपियों ने मौके से फरार हो गए। डॉक्टर ने तुरंत एम्स प्रशासन और पुलिस को सूचना दी।
पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी
मामले की शिकायत पर मोहद्दीपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने ओरियन मॉल से एम्स तक के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और आसपास के इलाकों में छापेमारी की। जांच में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। तीसरे की तलाश जारी है। पुलिस ने बताया कि आरोपियों की पहचान हो चुकी है और जल्द ही उन्हें पकड़ लिया जाएगा। मामले में आईपीसी की धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है, जिसमें स्टॉकिंग, यौन उत्पीड़न, नस्लीय भेदभाव और अन्य गंभीर धाराएं शामिल हैं।
सामाजिक और संस्थागत प्रतिक्रिया
यह घटना नॉर्थईस्ट भारत से आने वाले छात्रों-डॉक्टर्स के साथ होने वाले नस्लीय भेदभाव और महिलाओं की सुरक्षा पर
सवाल खड़े करती है। नेशनल फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (NAFORD) ने X (पूर्व ट्विटर) पर इसकी निंदा की और
एम्स प्रशासन से महिलाओं तथा नॉर्थईस्ट के छात्रों के लिए बेहतर सुरक्षा की मांग की।
संगठन ने कठोर कार्रवाई और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की अपील की।
एम्स गोरखपुर प्रशासन ने भी घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय से संपर्क किया और सुरक्षा
व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए। यह मामला पूरे देश में महिलाओं की सुरक्षा, नस्लवाद विरोध और
मेडिकल छात्राओं के लिए सुरक्षित वातावरण पर बहस छेड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि
ऐसे इलाकों में पेट्रोलिंग बढ़ानी चाहिए और सीसीटीवी की निगरानी सख्त होनी चाहिए।
यह घटना समाज में महिलाओं और अल्पसंख्यक समुदायों के साथ होने वाले
भेदभाव को उजागर करती है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि दोषियों को
जल्द सजा मिलेगी और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए विशेष अभियान चलाए जाएंगे।


