किसान संगठनों का सरकार पर हमला—“कॉरपोरेट का ₹3.20 लाख करोड़ माफ तो किसान की जमीन कुर्की कैसे?”

Gorakhpur Halchal

आजमगढ़। फूलपुर तहसील के खंडोरा गांव निवासी किसान मेवालाल की जमीन कथित तौर पर किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के करीब 1.50 लाख रुपये के पुराने कर्ज को लेकर कुर्क किए जाने का मामला सामने आया है।

किसान को 15 दिन के भीतर कर्ज जमा नहीं करने पर जमीन की नीलामी की चेतावनी दिए जाने का किसान संगठनों ने कड़ा विरोध किया है।

पूर्वांचल किसान यूनियन और सोशलिस्ट किसान सभा ने कार्रवाई को किसान विरोधी बताते हुए तत्काल कुर्की वापस लेने और किसान का कर्ज माफ करने की मांग की है।

किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई वापस नहीं ली गई तो फूलपुर तहसील से लेकर पूरे पूर्वांचल में जन अभियान चलाया जाएगा।
पूर्वांचल किसान यूनियन के महासचिव विरेंद्र यादव और सोशलिस्ट किसान सभा के महासचिव राजीव यादव ने आरोप लगाया

कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में सरकार ने पूंजीपतियों का ₹3.20 लाख करोड़ बट्टे खाते में डालकर माफ किया, जबकि एक गरीब किसान की करीब डेढ़ लाख रुपये की देनदारी को लेकर उसकी जमीन कुर्क की जा रही है जो किसानों के प्रति सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है।

किसान संगठनों ने मांग की कि मेवालाल की कुर्की तत्काल रद्द की जाए, नीलामी का नोटिस वापस लिया जाए और किसान का पूरा कर्ज माफ किया जाए।

साथ ही छोटे और सीमांत किसानों के KCC ऋण की एकमुश्त माफी की नीति घोषित करने तथा कर्ज माफी की नीति बनने तक किसानों की जमीन की कुर्की और नीलामी पर रोक लगाने की मांग की गई।

किसान संगठनों के अनुसार, खंडोरा निवासी मेवालाल ने वर्ष 2007 में किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए ₹1.50 लाख का ऋण लिया था।

खेती में लगातार नुकसान, बाढ़-सूखा और फसलों का उचित मूल्य नहीं मिलने के कारण वह ऋण नहीं चुका सके। आरोप है कि 6 अक्टूबर 2026 को बैंक कर्मचारियों और फूलपुर तहसील के राजस्व कर्मियों ने

किसान के घर पहुंचकर खेत के चारों तरफ लाल झंडी लगाई और जमीन की कुर्की की कार्रवाई की। किसान को नोटिस देकर कथित तौर पर चेतावनी दी गई कि 15 दिन के भीतर कर्ज जमा नहीं किया गया तो जमीन की नीलामी कर दी जाएगी।

किसान संगठनों ने कहा है कि मेवालाल की जमीन की कुर्की का मामला केवल एक किसान का मुद्दा नहीं, बल्कि प्रदेश के छोटे और सीमांत किसानों की आर्थिक स्थिति से जुड़ा सवाल है। संगठनों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर कार्रवाई रोकने की मांग की है।

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