जितनी फुर्सत में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं, उतनी निश्चिन्तता और मौजमस्ती में दुनिया का शायद ही कोई राष्ट्र प्रमुख हो ।
पूरी दुनिया फिक्रमंद हुई पड़ी है, ट्रम्प और नेतन्याहू के थोपे गए ईरान युद्ध और लेबनान हमलों के प्रभावों और नतीजों का आंकलन कर रही है।
होरमुज़ जलडमरूमध्य की पहले बंदी और अब अमरीकी नाकेबंदी के निहितार्थ को समझने में लगी हैं। उनके असरात से अपने-अपने देशों की अर्थव्यवस्थाओं को बचाने और संभालने के लिए रास्ते ढूँढने में जुटी है।
आर्थिक जगत की वैश्विक संस्थाएं भारत की आर्थिक गति-प्रगति को लेकर सवाल पर सवाल खड़े कर रही हैं, जिनके जवाब देने और अगर वे सही हैं,
तो जरूरी दुरुस्ती और सुधार करने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय उनका इन्तजार कर रहा है, मगर लगता है देश के प्रधानमंत्री छुट्टी पर हैं और उस पद पर विराजे नरेंद्र मोदी वीतरागी, तटस्थ, निस्पृह भाव के साथ पूरी बेफिक्री से मौजमस्ती और सैर सपाटे में मशगूल हैं।
उनकी पिछले कुछ दिनों की ‘व्यस्तताओं’ पर ही नजर डालने से बात और साफ़ हो जाती है। जब केंद्र सरकार भारतीय नागरिकों के लिए किसी भी मार्ग से
ईरान की यात्रा न करने की हिदायत जारी कर रही थी, भारत के झंडे लगे जहाज होरमुज़ में असमंजस में खड़े थे, अमरीकी नाकेबंदी ने उनकी सलामती खतरे में डाल दी थी, ऐसे में प्रधानमंत्री कहाँ थे?
वे बंगाल चुनाव प्रचार के दौरान हुगली नदी में नाव में सचमुच की सैर करते हुए एक महंगे कैमरे से न जाने किसकी तस्वीरे खीचने का अभिनय कर रहे थे।
ऐसा करते हुए हुए आठों आयामों पर तैनात अपने फोटोग्राफरों से अपनी ही तस्वीर उतरवा रहे थे। इस फोटोशूट से फारिग होते ही वे सीधे गंगटोक जा पहुंचे
यहाँ सिक्किम के 50वें राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर स्थानीय बच्चों के साथ स्पोर्ट्स जैकेट और जूतों में फुटबॉल खेलते हुए तस्वीरें खिंचवाई।
उनकी सरकार की विज्ञप्तियों में इसे ऊर्जा से भरे मोदी का अवतार बताया गया। यहाँ से उड़कर वे अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी (बनारस) में अवतरित हुए, जहां वे अब तक 5 बार गंगा आरती में भाग लेते हुए फोटो भी खिंचवा चुके हैं और फिल्म भी बनवा चुके हैं।
इस बार यहाँ दो दिन तक रुककर अनेक विशेष फोटो शूट करवाए और वीडियो बनवाये। महिलाओं के सम्मेलन में पहले भाषण देते हुए, फिर उनसे चर्चा करते हुए फोटो शूट का अगला चरण पूरा किया।
अगले दिन बनारस में ही 14 किलोमीटर लंबा रोड शो कर दिखाया। इस रोड शो में फूलों से सजी खुली गाड़ी में उनकी तस्वीरें और काशी की गलियों में लोगों का अभिवादन
स्वीकार करते हुए उनके फोटोशूट सामने आए। रोड शो के समापन पर उन्होंने काशी विश्वनाथ के मन्दिर में हाजिरी लगाई।
मंदिर परिसर से बाहर निकलते समय उन्होंने सबसे मारक फोटो शूट कराया। शंकर के वेश में श्रृंगार करके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में डमरू लेकर तस्वीरें खिंचाई।
इन्हें “भक्ति और शक्ति” के प्रतीक के रूप में अपने ही ट्विटर (अब एक्स) हैंडल से दुनिया भर को दिखाया भी। लगता है, यहाँ थोड़ी सी चूक हुई है क्योंकि शिव का वेश धरते हुए डमरू और त्रिशूल तो थाम लिया, मगर गले में सांप पहनना भूल गए।
इसके पहले असम के डिब्रूगढ़ के एक चाय बागान में काम करने वाली महिलाओं के साथ फोटो सेशन किया जा चुका था। नित नए, कई बार एक ही दिन में अनेक नए-नए परिधान में फोटो खिंचाने के इस चरण की पूर्णाहुति विधानसभा चुनाव नतीजे आने के बाद भाजपा कार्यालय में हुए उत्सव में हुई।
यहाँ उन्होंने पारंपरिक बंगाली धोती और पहनावे में तस्वीरें खिंचवाई। इन सबके पहले वे अंडमान निकोबार की सैर कर आये थे और एक भरा-पूरा फोटो अलबम बनवा लाये थे।
प्रधानमंत्री के सैर-सपाटे की यह अभी-अभी की ताज़ी-ताज़ी झलकें हैं। अपने 12 वर्ष के कार्यकाल में उन्होंने कितने दिन इस तरह के कामों के लिए निकाले हैं, इसका विवरण उनकी आधिकारिक साईट में भी नहीं समा पाया है।
(TO BE CONTINUED…)


