कुशीनगर। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संगठन में पदों के बंटवारे को लेकर एक नया विवाद सामने आया है।
भाजपा महिला मोर्चा की नई जिला कार्यसमिति की सूची जारी होने के बाद पार्टी की महिला नेत्री पूनम जायसवाल ने स्थानीय संगठन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
उनका एक वीडियो और सोशल मीडिया पर सामने आए बयान अब चर्चा का विषय बने हुए हैं। पूनम जायसवाल ने आरोप लगाते हुए कहा है कि
पार्टी के लिए वर्षों तक मेहनत करने, कार्यक्रमों में भाग लेने और अपनी जेब से खर्च करने के बावजूद उन्हें संगठन में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं दी गई।
उन्होंने अपने बयान में यहां तक कहा कि बड़े नेताओं का ‘बिस्तर गर्म नहीं किया’, इसलिए उन्हें पद नहीं मिला। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दिया है।
मेहनत और समर्पण के बाद भी जिम्मेदारी नहीं मिलने का आरोप
पूनम जायसवाल का कहना है कि उन्होंने लंबे समय तक भाजपा संगठन के लिए काम किया। पार्टी के कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी की,
भूखे-प्यासे रहकर संगठन के कार्यों को पूरा किया और कई बार अपनी जेब से भी खर्च किया। इसके बावजूद उन्हें नई जिला कार्यसमिति में अपेक्षित जिम्मेदारी नहीं मिली।
उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन में पद पाने के लिए मेहनत और समर्पण के बजाय पैसे और बड़े नेताओं की खुशामद को महत्व दिया जा रहा है।
उनका दावा है कि पुराने और मेहनती कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर दूसरे लोगों को जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं।
44 लोगों की नई कार्यसमिति के बाद बढ़ा विवाद
दरअसल, भाजपा महिला मोर्चा की नई जिला कार्यसमिति की सूची जारी होने के बाद यह विवाद सामने आया है। रिपोर्टों के मुताबिक, नई कार्यसमिति में कुल 44 पदाधिकारियों और सदस्यों को जिम्मेदारी दी गई है।
सूची में अपना नाम और अपेक्षित जिम्मेदारी नहीं मिलने से पूनम जायसवाल ने संगठन की चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
पूनम जायसवाल ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि उनकी नाराजगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से नहीं, बल्कि कुशीनगर के स्थानीय संगठन की कार्यप्रणाली से है।
उन्होंने स्थानीय स्तर पर पदों के वितरण में कथित मनमानी और पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का आरोप लगाया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा है कि उन्हें इस मामले में लिखित शिकायत की जानकारी नहीं है और संगठन में किसी भी विषय का समाधान बातचीत से किया जा सकता है।
हालांकि, पूनम जायसवाल के विशिष्ट आरोपों पर कोई स्पष्ट आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है।
पूनम जायसवाल के आरोपों ने एक बार फिर राजनीतिक संगठनों में महिला कार्य कर्ताओं की भूमिका और उन्हें मिलने वाले अवसरों को लेकर बहस छेड़ दी है।
यदि उनके आरोपों में सच्चाई है तो यह गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं, आरोपों की पुष्टि होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।

