नई दिल्ली। डॉक्टरों और अस्पतालों के विज्ञापन तथा सोशल मीडिया प्रचार को लेकर राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) की नई गाइडलाइन चर्चा में है।
इसके तहत चिकित्सा सेवाओं के प्रचार में भ्रामक दावों, मरीजों की निजता से खिलवाड़ और लुभावने ऑफरों के जरिए मरीजों को आकर्षित करने पर रोक संबंधी प्रावधान बताए गए हैं।
नई गाइडलाइन के अनुसार, ‘बेस्ट’, ‘नंबर-1’, ‘टॉप’, ‘मोस्ट ट्रस्टेड’ और ‘गारंटीड इलाज’ जैसे अप्रमाणित या भ्रामक दावों के जरिए मरीजों को प्रभावित नहीं किया जा सकेगा।
सोशल मीडिया पोस्ट, वेबसाइट, व्हाट्सऐप, पॉडकास्ट, इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग और AI से तैयार प्रचार सामग्री भी संबंधित नियमों के दायरे में आ सकती है।
मरीजों की फोटो और मेडिकल रिकॉर्ड के दुरुपयोग पर सख्ती
मरीजों की तस्वीरों, वीडियो, मेडिकल रिकॉर्ड, प्रशंसापत्र और इलाज के परिणामों का अनुचित इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। AI के जरिए नकली या भ्रामक सामग्री तैयार कर चिकित्सा सेवाओं का प्रचार करना भी प्रतिबंधित प्रावधानों के दायरे में आ सकता है।
चिकित्सा सेवाओं के लिए डिस्काउंट, कूपन, कैशबैक, उपहार, रेफरल भुगतान या मुफ्त प्रक्रियाओं के जरिए मरीजों को आकर्षित करने पर भी गाइडलाइन में सख्ती की बात कही गई है। इसका उद्देश्य चिकित्सा सेवाओं को अनुचित व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा और भ्रामक प्रचार से बचाना है।
वेबसाइट पर क्या जानकारी दे सकेंगे अस्पताल?
अस्पताल अपनी वेबसाइट पर विभागों, उपलब्ध सुविधाओं, शुल्क, डॉक्टरों की शैक्षणिक योग्यता और विशेषज्ञता जैसी तथ्यात्मक जानकारी दे सकेंगे।
स्वास्थ्य जागरूकता और जनहित में चिकित्सा संबंधी जानकारी साझा करना भी संभव होगा, लेकिन इसे भ्रामक या अनुचित व्यावसायिक प्रचार का माध्यम नहीं बनाया जा सकेगा।
नियम तोड़ने पर हो सकती है कार्रवाई
गाइडलाइन के उल्लंघन पर मामले की प्रकृति और लागू नियमों के अनुसार चिकित्सकीय पंजीकरण के निलंबन सहित अन्य अनुशासनात्मक या कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

