लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लेखपालों को राजस्व निरीक्षक के पद पर प्रोन्नति दिए जाने के मामले में 427 लेखपालों का प्रकरण लंबित होने से कर्मचारियों में असमंजस की स्थिति है।
प्रदेश के 882 पात्र लेखपालों में से अब तक 455 के प्रोन्नति आदेश जारी होने की बात सामने आई है, जबकि शेष 427 लेखपाल प्रोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
इस स्थिति को लेकर राजस्व परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के प्रदेश अध्यक्ष नीलेश रंजन राव ने
लंबित प्रोन्नति प्रकरणों पर चिंता जताते हुए कहा कि प्रदेश के सभी 75 जिलों के जिलाधिकारियों ने पात्र लेखपालों का विवरण राजस्व परिषद के अनुभाग-4 को उपलब्ध कराया था। इसके बावजूद शेष कर्मचारियों की प्रोन्नति लंबित रहना चिंता का विषय है।
बताया जा रहा है कि मानव संपदा पोर्टल पर दर्ज विवरण और जिलों से प्राप्त अभिलेखों में अंतर के कारण इन लेखपालों की प्रोन्नति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है।
संघ का कहना है कि यदि अभिलेखों में कोई विसंगति है, तो संबंधित जिलों से समन्वय स्थापित कर उसका सत्यापन और संशोधन कराया जा सकता है। तकनीकी या प्रशासनिक त्रुटियों के कारण पात्र कर्मचारियों को प्रोन्नति के लाभ से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए।
त्तर प्रदेश लेखपाल संघ ने राजस्व परिषद और शासन से मांग की है कि लंबित 427 लेखपालों के प्रकरणों का तत्काल परीक्षण कराया जाए।
मानव संपदा पोर्टल और जिला स्तरीय अभिलेखों में मौजूद विसंगतियों का समयबद्ध समाधान किया जाए तथा पात्र पाए जाने वाले सभी लेखपालों के प्रोन्नति आदेश नियमानुसार शीघ्र जारी किए जाएं।
संघ ने प्रोन्नति प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ लंबित प्रकरणों की स्थिति सार्वजनिक करने की भी मांग की है।
संघ के अनुसार, प्रोन्नति में देरी से संबंधित कर्मचारियों की सेवा संबंधी प्रगति, वरिष्ठता और मनोबल प्रभावित हो सकता है। ऐसे में जरूरी है कि लंबित मामलों का निष्पक्ष सत्यापन कर जल्द निस्तारण किया जाए।

