मुंबई/गोवा। हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। गुरुवार सुबह गोवा स्थित उनके आवास पर कार्डियक अरेस्ट के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।
उनके निधन की खबर से फिल्म जगत के साथ राजनीतिक गलियारों में भी शोक की लहर दौड़ गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नाना पाटेकर के निधन पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि
उनमें अभिनय की अद्भुत तीव्रता, अलग पहचान और प्रभावशाली मौजूदगी थी। उन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा में नाना के योगदान को याद करते हुए इसे बड़ी क्षति बताया।
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी उनके निधन को भारतीय सिनेमा के लिए अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने नाना पाटेकर की दमदार अदाकारी, संवाद अदायगी और कॉमिक टाइमिंग को याद करते हुए कहा कि उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नाना पाटेकर को याद करते हुए कहा कि वे पर्दे पर जितने बड़े कलाकार थे, दिल से उतने ही बड़े इंसान भी थे। ‘क्रांतिवीर’ से ‘नटसम्राट’ तक उनके अभिनय ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी।
फडणवीस ने उनक सामाजिक कार्यों और किसानों के लिए किए गए प्रयासों को भी याद किया। नाना पाटेकर ने करीब पांच दशक लंबे करियर में हिंदी और मराठी सिनेमा को कई यादगार किरदार दिए।
‘परिंदा’, ‘प्रहार’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘अब तक छप्पन’, ‘वेलकम’ और ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा।
उन्हें तीन बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और 2013 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। अभिनय के अलावा नाना पाटेकर सामाजिक कार्यों के लिए भी जाने जाते थे।
किसानों और जल संरक्षण से जुड़े कार्यों में उनकी सक्रिय भागीदारी रही। उनके निधन से भारतीय सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया, जिसकी आवाज, संवाद और अभिनय की तीव्रता लंबे समय तक दर्शकों के दिलों में गूंजती रहेगी।

