इंसानियत और मनुष्यता के पैरोकार पूर्वांचल गांधी डॉक्टर संपूर्णानंद मल्ल ने आक्रोश जताते हुए कहा है कि देश में सड़कों के किनारे या सड़कों पर अवस्थित अंधविश्वास के अड्डे ‘मंदिर’,
मस्जिद, मूर्तियां जो चोर, व्यभिचारी, बलात्कारी, अपराधी, बर्बर, आक्रांताओं से संबंधित हैं, जिसके कारण अप्रत्यक्ष रूप से देश की ‘आंतरिक एकता’ ‘केंचुए की तरह कमजोर’ होती जा रही है’ टूटती जा रही’ है, तोड़ दी जाँए.
परंतु ‘हेरिटेज मंदिर-मस्जिदों’ को सुरक्षित करें देश के भीतर जितने मंदिर, मस्जिद हैं उन्हें ‘विद्यालय, ‘चिकित्सालय’ या वाचनालय/ पुस्तकालय’ या अनाथालय’ में बदल दिया जाए.
मठों, ‘आश्रमों को ‘सार्वजनिक संपत्ति घोषित की जाए. सनातन धर्म, एवं हिंदू राष्ट्र, खालिस्तान की मांग करने वाले बाबाओं, संतो, मठों मठाधीशों ‘जिनमें अधिकांश व्यभिचारी,
‘बलात्कारी और अपराधी हैँ, को कठोर सजा दी जाए. ऐसा नहीं किया गया तो समय के साथ मंदिर’ मस्जिद’ हिंदू’ मुसलमान ‘हिंदूराष्ट्र ‘खालिस्तान’ के नाम पर भारत तोड़ देंगे जो कालापानी कठोर यातनाएं फांसी कुर्बानी से मिली है.
यह कम दुर्भाग्यपूर्ण नही है कि जो किसान अनाज पैदा करता है, मजदूर श्रम से कोठियां, ‘रेल पटेरियां, सड़कें बनाता है, परंतु वह भूख और ‘बेघर’ मर जाता है जबकि मंत्री, सांसद, विधायक, धनी, पूंजीपति, उद्योगपति, ‘संत,’ महंथ, पंडे, पुजारी, मुल्ले, मौलवी ऐश्वर्य एवं विलासिता में जीते हैँ.
इन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिख कर बताया है कि ‘गांधी, भगत सिंह, अंबेडकर, कलाम एवं 145 करोड लोगों का हिंदुस्तान जो भारत है उसको बचा लीजिए.


