गोरखपुर। ‘मुझे भारत, तिरंगा, संविधान और एकता चाहिए, न इससे कम न इससे अधिक और इसे लेकर रहूंगा।’
इस तीखे और स्पष्ट संदेश के साथ एक पूर्वांचल गाँधी डॉ संपूर्णानंद मल्ल ने देश की राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और संवैधानिक व्यवस्था में व्यापक बदलाव की मांग उठाया है।
कमिश्नर गोरखपुर को संबोधित अपने मांगपत्र में उन्होंने राष्ट्रीय एकता, लोकतंत्र, सामाजिक समानता, शिक्षा, स्वास्थ्य, न्यायपालिका, कृषि, रोजगार और सरकारी नीतियों से जुड़े कई गंभीर सवाल उठाए हैं।
अपने ज्ञापन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), राजनीतिक दलों, धार्मिक संस्थाओं, निजी शिक्षा एवं चिकित्सा व्यवस्था और सार्वजनिक संपत्तियों को लेकर भी विवादास्पद एवं व्यापक बदलाव की मांगें रखी गई हैं।
मांगकर्ता ने इन मुद्दों की संवैधानिक और कानूनी जांच कराने तथा सरकार से जवाबदेही तय करने की अपील की है।
RSS पर प्रतिबंध और संपत्तियों की जांच की मांग
इन्होंने मांग किया है कि RSS की गतिविधियों की सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ से जांच कराने, संगठन पर प्रतिबंध लगाने और उसकी संपत्तियों एवं संसाधनों को जब्त करने की बात कही है।
उन्होंने अपने पत्र में धार्मिक राष्ट्रवाद, सांप्रदायिकता और अलगाववाद को भारतीय संविधान, लोकतंत्र और राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा बताते हुए सवाल उठाया है कि
जब देश एक है, तिरंगा एक है और संविधान एक है तो देश की राजनीतिक एवं सामाजिक व्यवस्था में समानता क्यों नहीं दिखाई देती?
ज्ञापन में शरजील इमाम, उमर खालिद और मोहम्मद मुर्तजा अब्बासी की जेल में बंद रहने को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
वहीं गुजरात के पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट के मामले का उल्लेख करते हुए रिहाई की मांग भी रखी है।
उन्होंने सवाल किया कि कानून और न्याय की व्यवस्था में समानता का सिद्धांत सभी लोगों पर एक समान लागू क्यों नहीं होता?
हालांकि, इन मामलों में आरोपों, न्यायिक कार्यवाही और दोषसिद्धि की वास्तविक स्थिति का निर्धारण संबंधित अदालतों के आदेशों के आधार पर ही किया जा सकता है।
गरीबों के घरों पर बुलडोजर कार्रवाई का विरोध
बुलडोजर कार्रवाई को लेकर तीखी आपत्ति जताते हुए कहा है कि यदि कानून के तहत किसी व्यक्ति को दंडित करना है तो उसके लिए न्यायिक प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
किसी के आशियाने को ध्वस्त करना सजा का विकल्प नहीं हो सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रभावशाली लोगों की बड़ी-बड़ी संपत्तियों पर ऐसी कार्रवाई नहीं होती तो गरीबों के मकानों पर बुलडोजर क्यों चलाया जाता है?
उन्होंने बुलडोजर कार्रवाई रोकने और गरीबों के आवास की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
ज्ञापन का एक बड़ा हिस्सा शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था में समानता को लेकर है। मांग करता ने गरीब-अमीर सभी के लिए निशुल्क सरकारी विद्यालय, चिकित्सालय और रेल सेवा उपलब्ध कराने की मांग की है।
उनकी प्रमुख मांगें हैं: 1. स्नातक स्तर तक समान और निशुल्क शिक्षा । 2.निजी विद्यालयों और चिकित्सालयों का राष्ट्रीयकरण।
3. बंद किए गए विद्यालयों और कॉलेजों को दोबारा खोलना। 4. कोचिंग व्यवस्था को अपराध घोषित करना। 5. प्रत्येक जिले में सार्वजनिक कृषि आधारित उद्योग और दुग्ध उद्योग स्थापित करना।
उन्होंने पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस की कीमतों को लेकर भी सरकार से अपने पुराने चुनावी वादों के अनुरूप दरें लागू करने की मांग दुहराया है।
विधायिका, न्यायपालिका और पत्रकारिता में समानता का सवाल
ज्ञापन में राजनीतिक व्यवस्था में सुधार की मांग करते हुए विधायिका की सदस्यता को एक बार तक सीमित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
साथ ही लोकसभा और विधानसभा जैसे निचले सदनों के लिए न्यूनतम आयु 35 वर्ष तथा उच्च सदनों के लिए 50 वर्ष निर्धारित करने की मांग की गई है।
मांगकर्ता ने यह भी प्रस्ताव रखा है कि विधायिका के सदस्यों को 50 हजार रुपये मासिक पेंशन दी जाए। इसी प्रकार न्यायपालिका के वकीलों और पत्रकारिता से जुड़े पत्रकारों को भी समान पेंशन का लाभ मिले।
उन्होंने उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रीय न्यायिक सेवा परीक्षा के माध्यम से कराने तथा न्यायपालिका में कार्यपालिका के हस्तक्षेप को समाप्त करने की मांग भी उठाई है।

