गोरखपुर, 15 अक्टूबर। चिकित्सा प्रतिपूर्ति की नई ऑनलाइन व्यवस्था को लेकर कर्मचारियों और पेंशनरों की मुश्किलें अब विरोध का मुद्दा बन गई हैं।
गुरुवार को राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, गोरखपुर ने ऑनलाइन व्यवस्था की जटिलताओं के विरोध में प्रदर्शन करते हुए सेवारत कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए ऑफलाइन आवेदन व्यवस्था जारी रखने की मांग उठाई।
परिषद ने चेतावनी दी कि जब तक पोर्टल की तकनीकी और व्यावहारिक समस्याओं का समाधान नहीं होता तथा संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को समुचित प्रशिक्षण नहीं दिया जाता, तब तक नई व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू करना उचित नहीं है।
पेंशनरों के सामने सबसे बड़ी परेशानी: eHRMS कोड का अभाव
परिषद के अध्यक्ष रूपेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि वर्तमान ऑनलाइन चिकित्सा प्रतिपूर्ति व्यवस्था विशेष रूप से पेंशनरों के लिए जटिल साबित हो रही है।
अधिकांश पेंशनर कंप्यूटर संचालन में दक्ष नहीं हैं और व्यवस्था भी अभी पूरी तरह सुचारू नहीं है। ऐसे में ऑफलाइन आवेदन की सुविधा जारी रखना आवश्यक है।
उन्होंने सवाल उठाया कि वर्ष 2022 से पहले सेवानिवृत्त हुए जिन कर्मचारियों के पास eHRMS कोड उपलब्ध नहीं है, वे ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन कैसे करेंगे?
परिषद ने मांग की कि सेवारत कर्मचारियों और पेंशनरों के 1 अक्टूबर से पहले के सभी लंबित चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिलों का निस्तारण ऑफलाइन माध्यम से किया जाए।
पोर्टल का प्रशिक्षण पूरा होने तक लागू न हो नई व्यवस्था
मदन मुरारी, अशोक पांडेय, जनमेजय पांडेय और अनूप ने संयुक्त बयान में कहा कि ऑनलाइन व्यवस्था लागू करने से पहले कर्मचारियों, पेंशनरों और संबंधित विभागीय अधिकारियों की व्यावहारिक समस्याओं को दूर किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि 28 सितंबर 2026 को अपर मुख्य सचिव, वित्त की अध्यक्षता में आयोजित पेंशनर सलाहकार समिति की बैठक में पेंशनरों के लिए ऑनलाइन चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिल जमा करने की अनिवार्यता से राहत देने के मुद्दे पर चर्चा हुई थी।
इसके बावजूद 8 अक्टूबर 2026 को जारी शासनादेश के बाद भी कई समस्याएं बनी हुई हैं। परिषद की मांग है कि जब तक पोर्टल का पूर्ण और सुचारू प्रशिक्षण नहीं दिया जाता, तब तक ऑनलाइन व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू न किया जाए और ऑफलाइन आवेदन का विकल्प उपलब्ध रखा जाए।
SGPGIMS की दरों के बजाय वास्तविक खर्च के आधार पर मिले भुगतान
परिषद के पदाधिकारी सौरभ श्रीवास्तव ने चिकित्सा प्रतिपूर्ति के भुगतान की दरों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि SGPGIMS की निर्धारित दरें कई निजी अस्पतालों में होने वाले वास्तविक खर्च की तुलना में कम हैं।
इसलिए चिकित्सा प्रतिपूर्ति का भुगतान SGPGIMS की दरों के बजाय निजी अस्पतालों में प्रचलित वास्तविक दरों के आधार पर किया जाना चाहिए।
उन्होंने चिकित्सा प्रतिपूर्ति के बिलों से 10 प्रतिशत आयकर कटौती किए जाने पर भी आपत्ति जताई और इसे अनुचित बताते हुए तत्काल बंद करने की मांग की। साथ ही, एनपीसी से सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी चिकित्सा प्रतिपूर्ति का लाभ देने की मांग उठाई।
कर्मचारियों और पेंशनरों के हितों की रक्षा की मांग
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने स्पष्ट किया कि चिकित्सा प्रतिपूर्ति की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिससे जरूरतमंद कर्मचारियों और पेंशनरों को इलाज के खर्च की
भरपाई पाने में अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। परिषद ने लंबित बिलों के शीघ्र निस्तारण, ऑफलाइन व्यवस्था जारी रखने और भुगतान दरों की समीक्षा की मांग दोहराई।
प्रदर्शन के दौरान महेंद्र प्रसाद, रवि शर्मा, रामचंद्र दुबे, विकास तिवारी सहित परिषद के अन्य पदाधिकारी और सदस्य बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
मुख्य मांगें एक नजर में:
- सेवारत कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए ऑफलाइन आवेदन व्यवस्था जारी रहे।
- 1 अक्टूबर से पहले के लंबित चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिलों का ऑफलाइन निस्तारण हो।
- ऑनलाइन पोर्टल का प्रशिक्षण पूरा होने तक नई व्यवस्था अनिवार्य न की जाए।
- निजी अस्पतालों की वास्तविक प्रचलित दरों के आधार पर भुगतान हो।
- चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिलों से 10 प्रतिशत आयकर कटौती बंद करने की मांग पर विचार हो।
- एनपीसी से सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी चिकित्सा प्रतिपूर्ति का लाभ मिले।

