गोरखपुर: शाहपुर थाना क्षेत्र के सत्यपथ से पूर्वांचल गांधी डॉ संपूर्णानंद मल्ल ने राष्ट्रपति को संबोधित पत्र भेजकर देश में बेरोजगारी, गरीबी, महंगाई, सामाजिक विषमता, भ्रष्टाचार, हिंसा और अन्य समस्याओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
पत्र में इन्होंने सवाल किया है—“हमारे हिस्से का लोकतंत्र कहां है? हमारा संविधान कहां है?” पिछले एक दशक में राष्ट्रपति भवन को एक हजार से अधिक पत्र एवं ज्ञापन भेजे जा चुके हैं, लेकिन किसी पत्र का जवाब नहीं मिला।
इसी को लेकर पत्र में जवाबदेही और संवाद को लोकतंत्र की आत्मा तथा अपना मौलिक अधिकार बताते हुए व्यवस्था पर सवाल खड़े किए गए हैं।
इनका कहना है कि वह सत्य, अहिंसा और शौर्य के साथ तिरंगा दिल्ली की सड़कों पर उठाएंगे।” इसके साथ ही उन्होंने लोकतंत्र, संविधान, समानता और सामाजिक न्याय से जुड़े कई मुद्दे राष्ट्रपति के समक्ष उठाए हैं।
पत्र में खेती योग्य जमीन के समान वितरण को समानता की पहली सीढ़ी बताते हुए भूमिहीन लोगों के मुद्दे को उठाया गया है। साथ ही गरीब और अमीर सभी के लिए समान एवं निशुल्क शिक्षा, चिकित्सा और रेल सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
पत्र में विधायिका एवं कार्यपालिका के सदस्यों को मिलने वाले वेतन, निधियों, विशेषाधिकार और पेंशन को समाप्त करने की मांग की गई है। लेखक का तर्क है कि विशेषाधिकार समानता के मौलिक अधिकार के विपरीत हैं और किसानों एवं मजदूरों को अधिक सुविधाएं मिलनी चाहिए।
पत्र में आटा, चावल, दाल, तेल, चीनी, दवा, शिक्षा, चिकित्सा और रेल से संबंधित सेवाओं पर GST समाप्त करने की मांग भी रखी गई है। इसके अलावा निजी वाहनों के लिए टोल टैक्स समाप्त करने अथवा प्रत्येक दिशा में एक लेन को निःशुल्क रखने की मांग की गई है।
पत्र में लेखक ने लोकतंत्र, संविधान, सामाजिक समानता और मानवाधिकारों को लेकर अपनी चिंताएं राष्ट्रपति के सामने रखी हैं। साथ ही पत्र की प्रतिलिपि भारत के मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, वित्त मंत्री तथा केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री को भेजे जाने का उल्लेख किया गया है।

