गोरखपुर: उत्तर प्रदेश ने टीबी (क्षय रोग) उन्मूलन की दिशा में एक बड़ी छलांग लगाते हुए देश में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्य का गौरव हासिल किया है।
राज्य ने ‘100-दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान’ के तहत 31 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग कर 1.85 लाख नए टीबी मरीजों की पहचान की है, जिसमें 52 हजार ऐसे मरीज भी शामिल हैं जिनमें टीबी के कोई लक्षण नहीं थे।
यह जानकारी गोरखपुर एम्स में आयोजित ‘उत्तर प्रदेश में टीबी उन्मूलन’ विषयक तकनीकी संगोष्ठी में सामने आई। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव
(चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा) अमित कुमार घोष (IAS) ने राज्य की इस सफलता को रेखांकित करते हुए कहा, “नवाचार, प्रौद्योगिकी, साझेदारी और जनभागीदारी उत्तर प्रदेश की टीबी उन्मूलन यात्रा के मूल आधार हैं।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि अब सिर्फ लक्षणों के आधार पर जांच का समय नहीं है, बल्कि शीघ्र पहचान, शीघ्र निदान, शीघ्र उपचार और निरंतर निगरानी के साथ जोखिम व जनसंख्या आधारित सक्रिय सर्विलांस अपनाने की जरूरत है।
AI और आधुनिक तकनीक से यूपी ने रचा इतिहास-राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ. ऋषि कुमार सक्सेना ने बताया कि 24 मार्च, 2026 से शुरू हुए ‘100-दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान 2.0’ ने राज्य में टीबी नियंत्रण को नई गति दी है।
लक्ष्य से आगे: अभियान के दौरान 308 कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों की मदद से 30.4 लाख छाती के एक्स-रे किए गए, जो तय लक्ष्य का 111 प्रतिशत है।
गाँवों तक पहुँच: प्रदेश के 26,722 उच्च जोखिम वाले गांवों में से 25,073 गांवों (94%) को इस अभियान के तहत कवर किया गया।
रिकॉर्ड नोटिफिकेशन: जनवरी से जून 2026 के बीच उत्तर प्रदेश में 3.37 लाख टीबी रोगियों कानोटिफिकेशन दर्ज किया गया, जो सालाना 7 लाख के लक्ष्य का 48 प्रतिशत है।
एम्स गोरखपुर द्वारा आयोजित इस तकनीकी संगोष्ठी में राज्य स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सकों, निजी स्वास्थ्य क्षेत्र और सामुदायिक संगठनों के 60 से अधिक दिग्गजों ने हिस्सा लिया।
इसमें पद्मश्री डॉ. राजेंद्र प्रसाद और KGMU लखनऊ के श्वसन रोग विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) सूर्यकांत त्रिपाठी सहित देश के वरिष्ठ जनस्वास्थ्य शोधकर्ता शामिल हुए।
उद्घाटन सत्र में एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता, एसएम (सेवानिवृत्त) ने प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि
“एम्स गोरखपुर अपनी उन्नत चिकित्सीय सेवाओं और अनुसंधान क्षमता के माध्यम से इस लड़ाई में राज्य सरकार के साथ मजबूती से खड़ा है।”
चार प्रमुख स्तंभों पर बनी रणनीति-इस कॉन्क्लेव के दौरान टीबी उन्मूलन के चार मुख्य विषयों पर गहन मंथन किया गया:
निदान: आधुनिक एनएएटी (NAAT) जांच केंद्रों की भूमिका बढ़ाना। उपचार (Treatment): मरीजों के लिए उत्कृष्ट परिणाम सुनिश्चित करना।
निजी क्षेत्र की सहभागिता: प्राइवेट डॉक्टरों और अस्पतालों को अभियान से जोड़ना। सामुदायिक जनभागीदारी टीबी उन्मूलन को स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ पूरे समाज का साझा लक्ष्य बनाना।
संगोष्ठी के समापन पर विशेषज्ञों से मिले सुझावों और अनुशंसाओं के आधार पर राज्य एवं देश के लिए एक व्यावहारिक और साक्ष्य-आधारित कार्ययोजना तैयार की गई है, जिससे यूपी को पूरी तरह टीबी मुक्त बनाया जा सके।


