गोरखपुर: महानगर में एक तरफ सूबे के मुखिया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद थे, तो दूसरी तरफ कोतवाली पुलिस सरेआम लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का गला घोंटने में मसरूफ थी।
बीती रात एक गिरफ्तारी की कवरेज कर रहे पत्रकार के साथ न केवल बदसलूकी की गई, बल्कि क्षेत्राधिकारी (CO) के इशारे पर उनका मोबाइल भी छीन लिया गया।
ढाई घंटे तक पत्रकार को थाने में बैठाए रखने और जबरन वीडियो डिलीट कराने के बाद आधी रात को मोबाइल वापस किया गया। इस शर्मनाक घटना को लेकर गोरखपुर के पत्रकारों और विभिन्न संगठनों में भारी आक्रोश है।
क्या है पूरा मामला?
गोरखपुर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष व प्रेस क्लब के संरक्षक रत्नाकर सिंह ने एक पत्रकार वार्ता में इस पूरे घटनाक्रम का पर्दाफाश किया।
उन्होंने बताया कि बीती रात करीब 11:30 बजे कोतवाली पुलिस ने सपा नेता अरविंद उपेंद्र दत्त शुक्ला को सपा के महानगर अध्यक्ष शबीर कुरैशी के आवास से गिरफ्तार किया था।
इस दौरान मौके पर मौजूद आम नागरिकों सहित पत्रकार अमित भारती भी अपने मोबाइल से वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे।
तभी प्रभारी निरीक्षक कोतवाली छत्रपाल सिंह और क्षेत्राधिकारी (CO) कोतवाली ओमकार दत्त तिवारी ने उन्हें कवरेज करने से रोका।
अमित भारती ने जब अपना परिचय दिया कि वह पत्रकार हैं और प्रतिष्ठित ‘गोरखपुर जर्नलिस्ट एसोसिएशन’ के सदस्य हैं, तो अधिकारी भड़क गए। क्षेत्राधिकारी के आदेश पर नखास चौकी प्रभारी दुर्गेश वैश्य ने पत्रकार से उनका मोबाइल जबरन छीन लिया।
ढाई घंटे तक बंधक जैसी स्थिति, दबाव में डिलीट कराई रिकॉर्डिंग: घटना की जानकारी मिलते ही एसोसिएशन के अध्यक्ष रत्नाकर सिंह ने दोनों पुलिस अधिकारियों के सीयूजी (CUG) नंबरों पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन अधिकारियों ने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा।
इसके बाद, लगभग रात 12:30 बजे दरोगा दुर्गेश वैश्य ने पत्रकार अमित भारती का मोबाइल इस शर्त पर वापस किया कि वह की गई रिकॉर्डिंग को डिलीट करेंगे।
पुलिसिया दबाव में पत्रकार से रिकॉर्डिंग डिलीट कराई गई और इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पत्रकार को ढाई घंटे तक कोतवाली में बेवजह रोक कर रखा गया।
”मोबाइल किस अधिकार से और किस अपराध में छीना गया? क्या यह किसी व्यक्ति के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन नहीं है?
पुलिस को शांति व्यवस्था के लिए जो शक्तियां मिली हैं, क्या यह उसका खुल्लम-खुल्ला दुरुपयोग नहीं है? वह भी तब, जब खुद सूबे के मुख्यमंत्री शहर में मौजूद हों!”— रत्नाकर सिंह, अध्यक्ष (गोरखपुर जर्नलिस्ट एसोसिएशन)
इस दमनकारी कृत्य के खिलाफ गोरखपुर के पत्रकार लामबंद हो गए हैं। प्रेस वार्ता में गोरखपुर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मनोज श्रीवास्तव गणेश, प्रेस क्लब के कार्यकारी अध्यक्ष राधेश्याम प्रजापति और महामंत्री वहाब खान ने घटना पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
पत्रकार संगठनों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कौस्तुभ से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
पदाधिकारियों ने साफ किया कि इस मुद्दे को गोरखपुर जिला स्थाई समिति की बैठक में पूरी ताकत से उठाया जाएगा. घटना की लिखित शिकायत प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) और मानवाधिकार आयोग से भी की जाएगी।
बड़ा सवाल: अगर पत्रकार अमित भारती ने कोई अपराध किया था, तो पुलिस ने ढाई घंटे बाद मोबाइल वापस क्यों किया?
अगर वह निर्दोष थे, तो एक पत्रकार का फोन छीनकर लोकतंत्र की आवाज को दबाने की कोशिश क्यों की गई? पुलिस की यह कार्यप्रणाली अब बड़े सवालों के घेरे में है।


