दिशा छात्र संगठन, गोरखपुर इकाई द्वारा बुधवार को राष्ट्रपति के नाम जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर NEET UG 2026 परीक्षा में कथित धांधली और पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई।
संगठन ने आरोप लगाया कि NTA की लापरवाही और निजी ठेकेदारी व्यवस्था के कारण लाखों छात्रों का भविष्य संकट में पड़ गया है।
छात्र नेताओं ने कहा कि 03 मई 2026 को आयोजित NEET परीक्षा में देशभर के लगभग 22 लाख से अधिक छात्रों ने हिस्सा लिया था, लेकिन परीक्षा से पहले
सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुपों में कथित “गेस पेपर” वायरल होने और बाद में पेपर लीक की खबर सामने आने से छात्रों में भारी आक्रोश और मानसिक तनाव है।
संगठन के प्रतिनिधि आकाश और प्रशांत ने कहा कि लगातार पेपर लीक की घटनाएं देश की शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि
” NTA में स्थायी कर्मचारियों की भारी कमी है और परीक्षा से जुड़े अधिकांश कार्य निजी कंपनियों और ठेकेदारों को सौंप दिए गए हैं, जिससे भ्रष्टाचार और धांधली को बढ़ावा मिल रहा है।”
धर्मराज ने कहा कि पहले प्रश्न पत्र सरकारी प्रेस में छपते थे, जहां सुरक्षा ज्यादा मजबूत रहती थी, लेकिन अब निजी कंपनियों को ठेका दिए जाने से पेपर लीक जैसी घटनाएं बढ़ी हैं।
उन्होंने दावा किया कि पिछले आठ वर्षों में देशभर में 89 से अधिक पेपर लीक की घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे छात्रों और युवाओं का भविष्य लगातार खतरे में पड़ रहा है।
दिशा छात्र संगठन ने सरकार और NTA के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
संगठन की प्रमुख मांगें: _रद्द हुई NEET परीक्षा जल्द दोबारा कराई जाए।, धांधली और पेपर लीक में शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई हो।
पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून बनाया जाए, प्रभावित छात्रों को मुआवजा और फॉर्म फीस वापस की जाए, प्रश्न पत्रों की छपाई निजी प्रेस के बजाय सरकारी प्रेस में कराई जाए।


