आंगनबाड़ी का पुष्टाहार पोषण कम और ‘कल्पना शक्ति’ ज़्यादा बढ़ा रहा है: “गंवार” की कलम से..
कागज़ पर बच्चा पहलवान बन रहा है, ज़मीन पर पसलियाँ गिनने लायक रह जाती हैं। सरकार कहती है हर बच्चा स्वस्थ हो और ठेकेदार कहता है हर पैकेट हल्का हो। दोनों अपने-अपने लक्ष्य पर पूरी ईमानदारी से लगे हैं। एक किलो का पैकेट जब तराजू पर 800 ग्राम निकले तो समझ जाइए कि देश “विकास”…


