गोरखपुर। शाहपुर थाना क्षेत्र के सत्यपथ से 15 अक्टूबर 2026 को जारी एक बयान में एक आंदोलनकारी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सहित देश के प्रमुख संवैधानिक पदाधिकारियों के समक्ष कई मांगें उठाई हैं।
उन्होंने 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर दिल्ली के राजघाट स्थित गांधी समाधि से तिरंगा सत्याग्रह शुरू करने की घोषणा की है।
जारी बयान में गाँधी ने राष्ट्रपति भवन को भेजे गए अपने पत्रों और ज्ञापनों का जवाब मिलने को मौलिक अधिकार से जोड़ते हुए सवाल उठाया कि उनकी शिकायतों और मांगों पर जवाब क्यों नहीं दिया जा रहा है।
उन्होंने संविधान, लोकतंत्र और राष्ट्रीय एकता की रक्षा पर जोर देते हुए राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के सम्मान को आंदोलन का प्रमुख आधार बताया।
अपनी मांगों में बैलेट पेपर से मतदान का अधिकार, सभी के लिए समान शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं तथा सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने जैसे मुद्दे शामिल किए हैं।
उन्होंने निजी विद्यालयों और चिकित्सालयों को सार्वजनिक व्यवस्था के अंतर्गत लाने, स्नातक स्तर तक शिक्षा की जिम्मेदारी राज्य द्वारा सुनिश्चित करने और कृषि योग्य भूमि के समान वितरण की मांग भी उठाई।
इसके अलावा सार्वजनिक उपक्रमों और सार्वजनिक संपत्तियों के निजीकरण, निजी वाहनों पर टोल टैक्स, आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी तथा शिक्षा और चिकित्सा से जुड़े खर्चों पर सवाल उठाए हैं।
न्यायपालिका में उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए अखिल भारतीय परीक्षा कराने का सुझाव भी दिया है।अपने बयान में सांसदों, विधायकों और मंत्रियों की न्यूनतम प्रवेश आयु 35 वर्ष निर्धारित करने तथा उनके वेतन, निधियों और विशेषाधिकारों में बदलाव की मांग की गई है।
इन्होंने बेरोजगारी, गरीबी, महंगाई, सामाजिक विषमता, हिंसा और सांप्रदायिक तनाव जैसे मुद्दों के लिए मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराते हुए उसकी आलोचना की है।
अपना मांगपत्र राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सहित प्रमुख संवैधानिक पदाधिकारियों को संबोधित किया है। उन्होंने संविधान, लोकतंत्र, समानता और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन जारी रखने की बात कही है।

