गोरखपुर। “मैं गोरखपुर आकाशवाणी से उदिता श्रीवास्तव बोल रही हूं…”—कभी रेडियो पर सुनाई देने वाली यह आत्मीय आवाज अब हमेशा के लिए खामोश हो गई। उदिता श्रीवास्तव के निधन की खबर ने उनके चाहने वालों को गहरे शोक में डुबो दिया।
शीश महल, जाफरा बाजार से जुड़ी उदिता श्रीवास्तव केवल आकाशवाणी की जानी-पहचानी आवाज नहीं थीं, बल्कि रिश्तों को दिल से निभाने वाली ममतामयी शख्सियत थीं।
वरिष्ठ पत्रकार दिनेश चन्द्र श्रीवास्तव की धर्मपत्नी और वरिष्ठ पत्रकार बाबू मुन्ना लाल श्रीवास्तव की बहू उदिता जी मोहल्ले के लोगों के लिए धीरे-धीरे परिवार का हिस्सा बन गई थीं। बच्चे उन्हें प्यार से ‘बुआ जी’ और दिनेश जी को ‘फूफा जी’ कहते थे।
उनसे मेरा रिश्ता भी इसी स्नेह और आत्मीयता का था। आकाशवाणी गोरखपुर के स्टूडियो में उनसे हुई मुलाकातें आज यादों में ताजा हैं। जब मैं बड़े भाई एवं शीश महल दरगाह के गद्दीनशीन सज्जाद अली रहमानी के साथ स्टूडियो जाता, तो बुआ जी की खुशी देखते ही बनती थी। उनके प्रोत्साहन से मुझे शेरो-शायरी प्रस्तुत करने का अवसर भी मिला।
वह अक्सर कहा करती थीं—“तुम्हारे अंदर की ऊर्जा तुम्हें बहुत आगे लेकर जाएगी।” आज उनके जाने के बाद यही शब्द दिल को सबसे ज्यादा छूते हैं।
उदिता बुआ का जाना केवल एक परिवार की क्षति नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के लिए अपूरणीय दुख है, जिन्हें उनका स्नेह और अपनापन मिला। आकाशवाणी की वह आवाज अब सुनाई नहीं देगी, लेकिन उनकी यादें हमेशा दिलों में गूंजती रहेंगी।
कुछ आवाजें खामोश होकर भी कभी खामोश नहीं होतीं। उदिता बुआ भी उन्हीं आवाजों में से एक थीं। अलविदा उदिता बुआ!
आपका स्नेह, आपका विश्वास और आपके शब्द हमेशा याद रहेंगे। भावभीनी श्रद्धांजलि एवं अश्रुपूरित नमन।
मुर्तजा हुसैन रहमानी की कलम से

