गोरखपुर: मानवता और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व मिसाल पेश करते हुए गोरखपुर की सामाजिक संस्था मातृ आंचल सेवा संस्थान के
“अंतिम ममता अभियान” को जिला प्रशासन का एक बड़ा और ऐतिहासिक सहयोग मिला है। अब शहर में कोई भी अज्ञात या लावारिस शव सम्मान से वंचित नहीं रहेगा।
DM गोरखपुर ने एक आधिकारिक पत्र जारी कर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) और मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) को कड़े निर्देश दिए हैं।
निर्देश के मुताबिक, पोस्टमार्टम और सभी विधिक (कानूनी) औपचारिकताएं पूरी होने के बाद, अज्ञात एवं लावारिस शवों के सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए मातृ आंचल सेवा संस्थान से समन्वय स्थापित कर उनका सहयोग लिया जाएगा।
संस्थान की मुख्य ट्रस्टी पुष्पलता सिंह, जिन्हें लोग आदर से “अम्मा” कहते हैं, पिछले कई वर्षों से नि:स्वार्थ भाव से समाज सेवा में जुटी हैं।
वे अब तक सैकड़ों अज्ञात और लावारिस शवों का उनकी धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूरे आदर-सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करा चुकी हैं।
इसके अलावा, उनकी संस्था निराश्रितों, असहायों और जरूरतमंदों की मदद के लिए चौबीसों घंटे तत्पर रहती है। प्रशासन के इस कदम से उनके इस मानवीय मिशन को एक नई ताकत मिली है।
”प्रशासन के इस संवेदनशील फैसले के लिए हम जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मुख्य चिकित्साधिकारी सहित पूरे जिला प्रशासन का आभार व्यक्त करते हैं।
इस सहयोग से अब लावारिस शवों का अंतिम संस्कार और अधिक सुचारू, व्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से संपन्न हो सकेगा।” — पुष्पलता सिंह “अम्मा”, मुख्य ट्रस्टी
“अम्मा” ने साफ किया कि मातृ आंचल सेवा संस्थान का उद्देश्य केवल लावारिस शवों तक सीमित नहीं है। समाज का कोई भी ऐसा गरीब, असहाय या आर्थिक रूप से कमजोर परिवार
जो धन के अभाव में अपने परिजनों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार करने में असमर्थ है, वह बिना किसी संकोच के संस्था से संपर्क कर सकता है। संस्था अपने सामर्थ्य के अनुसार अंतिम संस्कार की पूरी व्यवस्था मुफ़्त और ससम्मान कराएगी।
यदि आपको कहीं कोई लावारिस शव मिले या किसी जरूरतमंद परिवार को सहायता की आवश्यकता हो, तो तुरंत इस नंबर पर सूचित करें: हेल्पलाइन नंबर: 📱 8707243476
संस्था ने गोरखपुर और आसपास के सभी जागरूक नागरिकों से अपील की है कि वे इस मानवीय अभियान का हिस्सा बनें और इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा लोगों और जरूरतमंद परिवारों तक पहुँचाएं, ताकि मानवता के इस कार्य में कोई भी पीछे न छूटे।


