गोरखपुर: यात्रियों को प्लेटफॉर्म पर होने वाली परेशानी से राहत देने के उद्देश्य से भारतीय रेलवे द्वारा ट्रेनों की कोच संरचना में किया गया बदलाव अब नई मुश्किलें खड़ी करता दिखाई दे रहा है।
पावर कार और एसी/स्लीपर कोच के बीच जनरल कोच लगाने के फैसले के कारण भीषण गर्मी में ट्रेनों में एसी और बिजली व्यवस्था प्रभावित होने लगी है।
PRKS के महामंत्री एवं NFIR के सहायक महामंत्री विनोद कुमार राय ने रेल प्रशासन को पत्र भेजकर बताया है कि इस व्यवस्था के कारण ऑन-बोर्ड इलेक्ट्रिक स्टाफ आपातकालीन स्थिति में
समय पर पावर कार तक नहीं पहुंच पाता। जनरल कोचों में अत्यधिक भीड़ होने से तकनीकी कर्मचारियों का रास्ता पूरी तरह बाधित हो जाता है।
कर्मचारियों के अनुसार, यदि यात्रा के दौरान एसी, लाइट या डीजी सेट में कोई खराबी आ जाए और फोन से संपर्क न हो सके, तो स्टाफ को मौके पर पहुंचकर समस्या दूर करनी होती है।
लेकिन जनरल कोचों की भारी भीड़ के कारण पावर कार तक पहुंचना लगभग असंभव हो जाता है। ऐसे में यात्रियों को अगले बड़े स्टेशन तक बिना एसी और बिजली के भीषण गर्मी झेलनी पड़ती है।
इस बदलाव का असर रेलवे सुरक्षा बल पर भी पड़ा है। दोनों तरफ जनरल कोच होने से जवानों को दो हिस्सों में तैनात करना पड़ता है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
कर्मचारी संघ का कहना है कि यात्रियों की सुविधा के लिए तकनीकी व्यवस्था से समझौता करना उचित नहीं है। संघ ने सुझाव दिया है कि स्टेशनों पर डिजिटल कोच पोजीशन डिस्प्ले
और स्पष्ट अनाउंसमेंट सिस्टम को और मजबूत किया जाए, ताकि यात्रियों को पहले से जानकारी मिल सके कि जनरल कोच ट्रेन के किस छोर पर है।
विनोद कुमार राय ने रेल प्रशासन से मांग की है कि पावर कार को पूर्व की तरह एक छोर पर जोड़ा जाए, जिससे तकनीकी स्टाफ आपातकालीन स्थिति में तुरंत कार्रवाई कर सके।
उनका कहना है कि इससे यात्रियों को बेहतर सुविधा, कर्मचारियों को राहत और रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत होगी।


