दिल्ली से उत्तराखंड को जोड़ने वाला दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे अब सरकार की आय का बड़ा स्रोत बनने जा रहा है। टोल वसूली शुरू होने के साथ ही इस प्रोजेक्ट से पहले ही साल में भारी कमाई का अनुमान लगाया गया है।
एक साल में 400 करोड़ से ज्यादा कमाई का अनुमान
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अनुसार इस एक्सप्रेसवे से पहले साल में करीब 408 करोड़ रुपये की कमाई होने का अनुमान है।
टोल वसूली के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है और प्रक्रिया पूरी होते ही इसी सप्ताह से टोल वसूली शुरू हो सकती है।
210 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे
यह एक्सप्रेसवे दिल्ली के अक्षरधाम से लेकर देहरादून तक करीब 210 किलोमीटर लंबा है।
इस परियोजना पर लगभग 13 हजार करोड़ रुपये की लागत आई है, जो इसे देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शामिल करती है।
यात्रा समय में बड़ी कमी
इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद दिल्ली से देहरादून की यात्रा
पहले के मुकाबले काफी तेज और आसान हो गई है।
जहां पहले घंटों लगते थे, अब कम समय में सफर पूरा हो रहा है,
जिससे यात्रियों को बड़ी राहत मिली है।
व्यापार और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
इस एक्सप्रेसवे से न केवल यातायात सुगम हुआ है, बल्कि व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होने से आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी।
सरकार के लिए बनेगा बड़ा रेवेन्यू सोर्स
टोल वसूली शुरू होने के बाद यह एक्सप्रेसवे सरकार के लिए एक बड़ा राजस्व स्रोत साबित होगा।
हर साल करोड़ों रुपये की आय से इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास कार्यों को और गति मिलेगी।
दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं बल्कि आर्थिक विकास का बड़ा माध्यम बनकर उभर रहा है।
तेज सफर, बेहतर कनेक्टिविटी और सरकार की बढ़ती आय—ये तीनों मिलकर इस प्रोजेक्ट को खास बनाते हैं।


