सांसद रवि किशन ने साइबर अपराध के खिलाफ कड़े कानून और फास्ट ट्रैक कोर्ट की उठाई मांग

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गोरखपुर से सांसद रवि किशन शुक्ला ने लोकसभा में भारत में बढ़ते साइबर अपराध पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि साइबर अपराध केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की संप्रभुता, गोपनीयता, आर्थिक और सामाजिक स्थिरता के लिए भी बड़ा खतरा बनता जा रहा है.

आज साइबर अपराध के कई रूप हैं, लेकिन हाल के दिनों में “डिजिटल अरेस्ट” जैसी नई तकनीकों के जरिए अपराधियों द्वारा लोगों को फंसाया जा रहा है.

आम नागरिक से लेकर साइबर एक्सपर्ट तक, हर वर्ग इस अपराध का शिकार हो रहा है. साइबर ठग न सिर्फ लोगों से करोड़ों की ठगी कर रहे हैं, बल्कि उन्हें मानसिक प्रताड़ना भी झेलनी पड़ रही है.

सांसद ने कहा कि “आज हर व्यक्ति—महिला, पुरुष, गरीब, अमीर, शिक्षित-अशिक्षित—इस साइबर अपराध की चपेट में आ रहा है। इसलिए इसे रोकने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है.”

सांसद ने बताया कि भारतीय साइबर अपराध अधिनियम 2000 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2008 के तहत अधिकतम 10 साल की सजा और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है.

बावजूद इसके, साइबर अपराधियों पर प्रभावी रोक नहीं लग पाई है और पीड़ितों को उनकी गाढ़ी कमाई वापस नहीं मिल पा रही. उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इन कानूनों में “डिजिटल अरेस्ट” जैसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, जिससे साइबर अपराधियों पर प्रभावी कार्रवाई करने में दिक्कतें आ रही हैं.

रवि किशन ने सरकार द्वारा उठाए गए कुछ प्रयासों की सराहना की, जिसमें टोल फ्री नंबर 1930 और चक्षु पोर्टल के जरिए साइबर अपराध की शिकायत करने की सुविधा दी गई है.

इसके अलावा, जब भी कोई संदिग्ध नंबर डायल किया जाता है, तो उपभोक्ता को जागरूक करने के लिए एक चेतावनी संदेश भी सुनाई देता है. हालांकि, उन्होंने कहा कि “इन सभी प्रयासों के बावजूद साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है, हमें और कठोर कदम उठाने होंगे.”

साइबर अपराध के खिलाफ सांसद रवि किशन की प्रमुख मांगें:

1. मौजूदा साइबर कानूनों में संशोधन: अपराधियों को कठोर दंड देने और डिजिटल अरेस्ट जैसी नई चुनौतियों का समाधान करने के लिए।

2. नया विशिष्ट साइबर कानून: अगर मौजूदा कानून प्रभावी नहीं हो रहे हैं, तो साइबर अपराध के लिए एक अलग कानून बनाया जाए।

3. साइबर अपराध के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट: जैसे SC/ST कोर्ट और MP/MLA कोर्ट बनाए गए हैं, उसी तरह साइबर अपराध मामलों के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएं, ताकि समयबद्ध तरीके से केसों का निपटारा हो सके।

4. मजबूत डिजिटल साक्ष्य सुरक्षा प्रणाली: क्योंकि जैसे-जैसे समय बीतता है, साइबर अपराध के साक्ष्य नष्ट हो जाते हैं, जिससे अपराधियों को सजा दिलाने में कठिनाई होती है।

सांसद रवि किशन ने कहा कि “इस मुद्दे पर सिर्फ सरकार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज को भी जागरूक होने की जरूरत है. डिजिटल युग में सुरक्षित रहने के लिए हमें सतर्कता बरतनी होगी और साइबर सुरक्षा के प्रति संवेदनशील होना पड़ेगा.”

उन्होंने सदन से अपील की कि इस विषय पर गहन विचार-विमर्श किया जाए और जल्द से जल्द प्रभावी कानून बनाकर साइबर अपराधियों पर सख्त कार्रवाई की जाए.

 

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