हिंदू राष्ट्र शब्द को अलगाववादी और राष्ट्र विरोधी घोषित करें राष्ट्रपति महोदया: पूर्वांचल गाँधी

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Gorakhpur: समाजविद, पर्यावरणविद, जन सरोकार से जुड़े मुद्दों को जोरदार ढंग से उठाने वाले पूर्वांचल गाँधी डॉ सम्पूर्णानन्द मल्ल ने

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर माँग किया है कि सदन में एक ऐसा कानून बनाया जाए जिसमें ‘हिंदू राष्ट्र,’ ‘खालिस्तान’, ‘पाकिस्तान’ शब्द अलगाववादी’ राष्ट्र विरोधी’ घोषित कर दिया जाए.

सत्यपथ इकलौता मार्ग है जिस पर मैं चलता हूं. मुझे संविधान चाहिए न कम न अधिक. अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए इन्होंने लिखा है कि

“नरेंद्र मोदी को पीएम पद से हटाइए क्योंकि इन्होंने लोकतंत्र, संविधान तोड़ा है, हिंसा को स्वीकृति दी है.”

आज भारत ‘इकोनामिक अनार्की’ की जमीन में तब्दील हो गया है. इनका सुझाव  विख्यात अर्थशास्त्री सुब्रमण्यम स्वामी को पीएम बनाने का भी है.

धीरेंद्र शास्त्री ‘अलगाववादी’ राष्ट्र विरोधी बयान दे रहा है. कानून के अनुसार इसकी सजा तय की जाए.

इनका सवाल है कि धीरेंद्र शास्त्री ने कभी भी 145 करोड लोगों में किसी भी एक के लिए जीवन, शिक्षा, चिकित्सा के हिफाजत की बात की है क्या?

हिंदू राष्ट्र, मंदिर, मूर्तियां, आस्था, अंधविश्वास, पाखंड फैलाता है. हमें कभी नही भूलना चाहिए कि हिंदू राष्ट्र, हिंदू एकता अपने आप में अलगाववादी शब्द है.

यह हिंदू-मुस्लिम एकता से अलग है जो हिंद की विरासत है. धीरेंद्र शास्त्री का हिंदू राष्ट्र बयान खालिस्तान, पाकिस्तान की मांग करने वाले अलगाववादियों से मिलता है.

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने इसे Y श्रेणी सुरक्षा इसलिए दी है कि यह हिंदू राष्ट्र की मांग कर सके, अंधविश्वास, पाखंड को फैला सके.

इसकी वॉई श्रेणी सुरक्षा बंद करते ही ‘हिंदू राष्ट्र’ अलगाववादी शब्द का जाप बंद कर देगा.

जब भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, रोशन सिंह, राजेंद्र लाहिड़ी, चंद्रशेखर आजाद,

मदन लाल ढींगरा ने हिंदू राष्ट्र की बात नहीं किया जिन्होंने भारत की आजादी के लिए फांसी का फंदा पकड़ लिया था.

तब ये सदन में बैठे अपराधी, बलात्कारी, व्यभिचारी, अंधविश्वासी, पाखंडी, धूर्त ( कुछ को छोड़ कर) लोगों की कमाई एवं कर पर परजीवी की तरफ पलने वाले माननीय (कुछ को छोड़ कर) क्यों कर रहे हैं?

गांधी, भगत सिंह, अंबेडकर, एपीजे अब्दुल कलाम ने क्या हिंदू राष्ट्र की मांग किया.? नहीं… फिर सत्ता के भूखे भेड़िए’ हिंद के हिंदुस्तानी लुटेरे’ जो सदनों में भी है.

सदन के बाहर भी हैं, RSS, PM नरेंद्र मोदी और अन्य हिंदू राष्ट्र का नाम क्यों ले रहे हैं ? क्या भारत कहने से उनका सीना चौड़ा नहीं होता?

कोई बताए हिंदू राष्ट्र का नाम लेने वालों को मैं अलगाववादी न कहूं तो क्या कहूं?
भारत अपने उदय काल से भारत है,

संविधान में इसे ‘भारत, दैट इज ‘इंडिया’ कहा गया है. हम दिल से इसे हिंदुस्तान पुकारते हैं, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद,

बिस्मिल, अशफाकउल्ला, राजेंद्र लाहिड़ी, उधम सिंह आदि ‘हिंदुस्तान’ कहते थे. यदि हम हिंदू राष्ट्र कहते हैं तो ‘भारत’ एवं ‘संविधान’ कुचलते हैं.

 

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