मेरठ क्राइम न्यूज: जिस आंगन में कन्यादान होना था, वहीं टूटकर बिखरे सपने – रूबी का रिश्ता तय, अप्रैल में होनी थी शादी; मां की हत्या के बाद बेटी अपहृत, आरोपी फरार

जिस आंगन में कन्यादान होना था जिस आंगन में कन्यादान होना था

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में सरधना थाना क्षेत्र के कपसाड़ गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। 9 जनवरी 2026 को सुबह करीब 8 बजे एक दलित महिला सुनीता अपनी 20 वर्षीय बेटी रूबी के साथ खेत की ओर जा रही थीं। रास्ते में गांव के ही युवक पारस राजपूत (कुछ रिपोर्ट्स में कंपाउंडर बताया गया) ने उन्हें रोका और बेटी के साथ अभद्रता की। विरोध करने पर उसने धारदार हथियार से महिला पर हमला कर दिया, जिससे गंभीर रूप से घायल सुनीता की अस्पताल में मौत हो गई। हमलावर ने मौके पर ही रूबी का अपहरण कर लिया और फरार हो गया।

परिवार के टूटे सपने और शादी की तैयारियां

रूबी तीन भाइयों के बाद परिवार की इकलौती बेटी थी। मां सुनीता ने उसके जन्म से ही कन्यादान के सपने संजोए थे। परिवार ने रूबी का रिश्ता तय कर लिया था और अप्रैल 2026 में उसकी शादी होने वाली थी। पिता और परिजनों ने बताया कि शादी की तारीख मई में फिक्स थी, लेकिन मुहूर्त निकालकर इसे अप्रैल में शिफ्ट करने की तैयारी चल रही थी। मां सुनीता बेटी की विदाई की तैयारियों में जुटी थीं, लेकिन एक पल में सब कुछ मातम में बदल गया। जिस आंगन में डोली सजनी थी, वहां अब सिर्फ दर्द और आंसू बाकी हैं।

घटना के बाद गांव में तनाव और राजनीतिक हंगामा

घटना के बाद कपसाड़ गांव में भारी तनाव फैल गया। परिजनों ने मां के शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया और आरोपी की गिरफ्तारी तथा बेटी की सुरक्षित वापसी की मांग की। कई घंटों की जद्दोजहद के बाद प्रशासन के आश्वासन पर शुक्रवार शाम अंतिम संस्कार हुआ। गांव में आरएएफ और कई थानों की पुलिस तैनात कर दी गई है। सभी संपर्क मार्ग सील कर दिए गए।

मामला राजनीतिक रंग ले चुका है। सपा विधायक अतुल प्रधान, रामजीलाल सुमन और अन्य नेताओं को गांव जाने से रोका गया, जिस पर वे टोल प्लाजा पर धरने पर बैठ गए। भीम आर्मी और सपा कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। मायावती ने घटना की कड़ी निंदा की और महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठाए। पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। 10 से अधिक टीमें अलग-अलग जिलों में छापेमारी कर रही हैं, लेकिन अभी तक रूबी का कोई सुराग नहीं मिला है।

समाज में बढ़ती चिंता और सवाल

यह घटना दलित परिवारों में महिलाओं की सुरक्षा,

जातिगत हिंसा और अपहरण जैसे मुद्दों को फिर से उजागर कर रही है।

परिवार का दर्द बयां नहीं किया जा सकता।

पिता ने कहा कि बेटी की शादी की खुशियां अब मातम में बदल गई हैं।

प्रशासन से अपेक्षा है कि जल्द आरोपी को पकड़ा जाए और रूबी को सुरक्षित वापस लाया जाए।

यह दर्दनाक वारदात एक बार फिर याद दिलाती है कि ग्रामीण इलाकों में महिलाओं की सुरक्षा कितनी कमजोर है।

उम्मीद है कि जांच तेज होगी और न्याय मिलेगा।

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