कौन बनेगा बीएमसी मेयर? शिवसेना पार्षदों की किलेबंदी और होटल पॉलिटिक्स, संजय राउत ने तंज कसा – ‘डर किसे है?’

मुंबई बीएमसी मेयर चुनाव में मुंबई बीएमसी मेयर चुनाव में

बीएमसी मेयर चुनाव: मुंबई की सियासत में नया दौर

मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के मेयर पद के लिए चल रही जंग अब और रोमांचक हो गई है। नवनिर्वाचित पार्षदों की किलेबंदी और होटल पॉलिटिक्स के बीच शिवसेना यूबीटी के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने एकनाथ शिंदे गुट पर तीखा तंज कसा है। राउत ने कहा, “पार्षदों को होटल में रखकर क्या डर है? आखिर किससे डर रहे हैं? अगर इतना भरोसा है तो खुलेआम वोटिंग क्यों नहीं होने देते?”

यह बयान ऐसे समय आया है जब बीएमसी चुनाव में शिवसेना के दोनों गुट – एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे गुट – मेयर पद के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। मुंबई की सबसे बड़ी सिविक बॉडी में मेयर पद सिर्फ एक कुर्सी नहीं, बल्कि शहर की सत्ता और विकास पर नियंत्रण का प्रतीक है।

पार्षदों की किलेबंदी और होटल पॉलिटिक्स

बीएमसी चुनाव परिणाम आने के बाद दोनों गुट अपने-अपने पार्षदों को होटल में शिफ्ट कर रहे हैं। शिंदे गुट ने अपने नवनिर्वाचित पार्षदों को मुंबई के एक लग्जरी होटल में रखा है ताकि कोई संपर्क न हो सके और व्हिप का उल्लंघन न हो। वहीं उद्धव ठाकरे गुट भी अपने पार्षदों को सुरक्षित स्थान पर रखकर काउंटर कर रहा है।

संजय राउत ने इस पूरे घटनाक्रम पर व्यंग्य करते हुए कहा, “जिन्हें लगता है कि बहुमत उनके पास है, वे पार्षदों को होटल में क्यों बंद कर रहे हैं? डर किसे है? क्या कहीं कोई बगावत का डर है या फिर कोई और खेल चल रहा है?”

राउत का यह तंज सीधे शिंदे गुट पर है, जिन्हें वे “होटल पॉलिटिक्स” करने वाला बता रहे हैं।

मेयर चुनाव की गणित और दांव-पेंच

बीएमसी में कुल 227 सीटें हैं। मेयर बनने के लिए कम से कम 114 पार्षदों का समर्थन चाहिए। चुनाव आयोग के अनुसार, शिवसेना शिंदे गुट को सबसे ज्यादा सीटें मिली हैं, लेकिन वह बहुमत से अभी भी दूर है। उद्धव ठाकरे गुट, कांग्रेस, एनसीपी (शरद पवार गुट) और अन्य विपक्षी दलों ने गठबंधन कर शिंदे गुट को कड़ी चुनौती दी है।

कई पार्षदों के निर्दलीय और छोटे दलों के साथ मिलने की संभावना से स्थिति और रोमांचक हो गई है। दोनों पक्ष पिछले कुछ दिनों से इन निर्दलीय और छोटे दलों के पार्षदों पर कड़ी नजर रखे हुए हैं।

संजय राउत का बयान और राजनीतिक अर्थ

संजय राउत का यह बयान सिर्फ तंज नहीं, बल्कि शिंदे गुट की कमजोरी को उजागर करने की रणनीति भी है।

राउत ने कहा कि अगर बहुमत इतना मजबूत होता तो पार्षदों को

होटल में बंद करने की जरूरत ही नहीं पड़ती। उन्होंने बीएमसी चुनाव को

“लोकतंत्र का मखौल” करार देते हुए कहा कि असली जनादेश का सम्मान होना चाहिए।

वहीं शिंदे गुट के नेताओं ने इसे “बेबुनियाद आरोप” बताया और कहा कि

वे अपने पार्षदों की सुरक्षा और एकता सुनिश्चित कर रहे हैं।

मुंबई मेयर की कुर्सी पर अंतिम निर्णायक घंटे

बीएमसी मेयर चुनाव अब निर्णायक दौर में पहुंच चुका है। होटल पॉलिटिक्स,

पार्षदों की किलेबंदी और संजय राउत जैसे नेताओं के तीखे बयानों से साफ है कि

यह सिर्फ एक कुर्सी की लड़ाई नहीं, बल्कि मुंबई की सत्ता की लड़ाई है।

आने वाले दिनों में निर्दलीय और छोटे दलों की भूमिका सबसे अहम होगी।

मुंबईवासियों की नजर इस बात पर है कि आखिर कौन बनेगा बीएमसी का नया मेयर।

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