देशव्यापी विरोध का दौर शुरू
प्रस्तावित इलेक्ट्रिसिटी (संशोधन) बिल 2025 के खिलाफ गुरुवार को उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश में बिजली कर्मचारियों, इंजीनियरों और यूनियनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। बिजलीघरों, ट्रांसमिशन केंद्रों, वितरण कार्यालयों और जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन और विरोध सभाएं आयोजित की गईं। All India Power Engineers Federation (AIPEF) और National Coordination Committee of Electricity Employees and Engineers (NCCOEEE) के आह्वान पर हुए इस प्रदर्शन में हजारों कर्मचारी शामिल हुए। सभी जगह बिल को तुरंत वापस लेने की मांग के नारे लगे।
प्रदर्शन का मुख्य कारण: बिल किसान-उपभोक्ता-कर्मचारी विरोधी
AIPEF के चेयरमैन और विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि यह बिल बिजली क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निजीकरण को बढ़ावा देगा, जिससे सार्वजनिक बिजली व्यवस्था कमजोर हो जाएगी। बिल के प्रावधानों से किसानों को मिलने वाली रियायती बिजली खत्म हो सकती है। अगले पांच वर्षों में क्रॉस-सब्सिडी समाप्त करने का प्रावधान सिंचाई बिजली को महंगा बना देगा, जिससे कृषि लागत बढ़ेगी और किसान प्रभावित होंगे।
ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति पर खतरा
संघर्ष समिति का कहना है कि निजी कंपनियां ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देने से बच सकती हैं। एक ही क्षेत्र में कई वितरण लाइसेंस देने से निजी कंपनियां केवल अधिक भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं (शहरी, औद्योगिक) को चुनेंगी, जबकि घाटे वाले उपभोक्ता (ग्रामीण, गरीब) सरकारी कंपनियों के पास रह जाएंगे। इससे सार्वजनिक बिजली कंपनियां आर्थिक रूप से और कमजोर हो जाएंगी।
नौकरियों और सेवा शर्तों पर संकट
प्रदर्शनकारियों ने आशंका जताई कि निजीकरण से हजारों बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं। कर्मचारियों की संख्या में कटौती, ठेका प्रथा में वृद्धि और सेवा शर्तों में गिरावट की संभावना है। यह बिल देश की संघीय व्यवस्था को भी कमजोर कर सकता है, क्योंकि बिजली समवर्ती सूची का विषय होने के बावजूद केंद्र सरकार के अधिकारों में अत्यधिक वृद्धि प्रस्तावित है।
राजनीतिक दलों से अपील और आगे की रणनीति
संघर्ष समिति ने सभी राजनीतिक दलों के सांसदों से अपील की है कि वे संसद में इस बिल का विरोध करें और
किसानों, उपभोक्ताओं तथा बिजली कर्मचारियों के हितों की रक्षा करें। समिति ने दोहराया कि बिजली
एक आवश्यक सार्वजनिक सेवा है। इसे सभी नागरिकों को सस्ती, सुलभ और
विश्वसनीय रूप से उपलब्ध रहना चाहिए। इसलिए सरकार से मांग की गई है कि
इलेक्ट्रिसिटी (संशोधन) बिल 2025 को तत्काल वापस लिया जाए और
बिजली क्षेत्र में किसी भी सुधार से पहले सभी संबंधित पक्षों से व्यापक संवाद किया जाए।
बिजली क्षेत्र के भविष्य पर सवाल
यह प्रदर्शन बिजली क्षेत्र में प्रस्तावित बड़े बदलावों के खिलाफ एकजुट विरोध का संकेत है।
यदि बिल पास हुआ तो इसका असर किसानों, आम उपभोक्ताओं और
लाखों कर्मचारियों पर पड़ेगा। अब सबकी नजरें केंद्र सरकार और संसद पर टिकी हैं कि क्या
यह बिल वापस लिया जाएगा या और तेज विरोध होगा। बिजली एक बुनियादी जरूरत है और
इसकी सार्वजनिक प्रकृति को बनाए रखना हर किसी की जिम्मेदारी है।


