यूपी MBBS छात्र 11 साल बाद अंतिम मौका: BRD मेडिकल कॉलेज में 2010 बैच का छात्र अब पास कर सकेगा डिग्री

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर BRD मेडिकल उत्तर प्रदेश के गोरखपुर BRD मेडिकल

UP MBBS छात्र को 11 साल बाद अंतिम अवसर: BRD मेडिकल कॉलेज में डिग्री की राह खुली

उत्तर प्रदेश में मेडिकल शिक्षा से जुड़ा एक अनोखा और लंबा लंबित मामला सामने आया है। बाबा राघव दास (BRD) मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर में वर्ष 2010 बैच के एक छात्र को अब एमबीबीएस की डिग्री पूरी करने का अंतिम मौका दिया गया है। यह छात्र 11 साल से परीक्षा पास नहीं कर पा रहा था, जिसके कारण उसकी डिग्री रुकी हुई थी।

जनवरी 2026 में इन पुराने मामलों की समीक्षा के दौरान दस वर्ष से अधिक समय तक परीक्षा पास न कर पाने वाले छात्रों पर पुनर्विचार किया गया। मेडिकल काउंसिल की नई व्यवस्था के तहत छात्र को आगामी सप्लीमेंट्री परीक्षा में दोनों विषयों में पास होने पर एमबीबीएस डिग्री प्रदान करने का फैसला लिया गया है।

मामला क्या है?

यह छात्र सीपीएमटी के माध्यम से वर्ष 2010 में BRD मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में दाखिला लिया था। कई बार परीक्षा देने के बावजूद वह सफल नहीं हो सका। पिछली परीक्षा में वह दो विषयों की सप्लीमेंट्री में फेल हो गया, जिसके बाद उसकी डिग्री रोक दी गई थी।

अब NMC के नियमों के अनुसार उसे एक अंतिम अवसर मिला है। अगर वह आगामी परीक्षा में सफल हो जाता है तो उसे डिग्री दे दी जाएगी।

अन्य बैचों के छात्र भी प्रभावित

यह मामला केवल 2010 बैच तक सीमित नहीं है। इसी तरह:

  • 1998 बैच
  • 2008 बैच
  • 2013 बैच

के तीन अन्य छात्रों के परिणाम भी वर्षों से लंबित हैं। इनमें से एक मामले की सुनवाई कोर्ट में चल रही है। इन छात्रों का रिजल्ट इसलिए रोका गया था क्योंकि उन्होंने निर्धारित समय सीमा के अंदर परीक्षा पूरी नहीं की थी।

पुराने MCI नियमों और नए NMC नियमों के बीच का अंतर इन मामलों की जटिलता बढ़ा रहा है। NMC अब एमबीबीएस कोर्स को 9 वर्ष की समय सीमा में पूरा करने का प्रावधान रखता है, जबकि ये छात्र पुराने बैच के हैं।

मेडिकल शिक्षा में समय सीमा का महत्व

मेडिकल काउंसिल के नियमों में बदलाव के बाद ऐसे लंबे लंबित मामलों की समीक्षा की जा रही है। लक्ष्य है कि योग्य छात्रों को उचित मौका मिले लेकिन अनावश्यक देरी भी न हो।

BRD मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इन मामलों को गंभीरता से लिया है। जनवरी में

हुई समीक्षा के बाद 2010 बैच के छात्र को अंतिम अवसर देने का फैसला लिया गया।

अन्य छात्रों के मामले भी जल्द निस्तारित किए जाने की उम्मीद है।

छात्रों और अभिभावकों के लिए संदेश

यह घटना मेडिकल छात्रों के लिए सबक है कि कोर्स के दौरान नियमित रूप से

परीक्षा दें और फेल होने पर तुरंत सप्लीमेंट्री का प्रयास करें।

लंबे समय तक अटकने से डिग्री पर असर पड़ता है और करियर प्रभावित होता है।

जो छात्र ऐसे पुराने बैच में हैं, उन्हें अपने कॉलेज प्रशासन या

NMC से संपर्क करना चाहिए। समय पर दस्तावेज और

आवेदन जमा करने से कई समस्याएं हल हो सकती हैं।

उत्तर प्रदेश में मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और समयबद्ध कोर्स पूरा कराने के प्रयास जारी हैं। BRD मेडिकल कॉलेज

जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में ऐसे मामले दुर्लभ हैं लेकिन इनसे सिस्टम में सुधार की जरूरत भी उजागर होती है।

अगर आप या आपके परिचित किसी मेडिकल छात्र ऐसे मामले से गुजर रहे हैं तो

तुरंत संबंधित कॉलेज या उच्च शिक्षा विभाग से संपर्क करें।

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