उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर दलित राजनीति और कांग्रेस-बसपा के रिश्तों को लेकर बयानबाज़ी तेज हो गई है। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष Mayawati ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि कांग्रेस की दलित विरोधी मानसिकता के कारण ही बसपा की स्थापना करनी पड़ी थी।
उन्होंने यह भी कहा कि जब कांग्रेस कई वर्षों तक केंद्र की सत्ता में रही, तब उसने दलितों के महान नेता और भारतीय संविधान के निर्माता B. R. Ambedkar को वह सम्मान नहीं दिया जिसके वे हकदार थे। मायावती के इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
कांग्रेस पर दलित विरोधी मानसिकता का आरोप
बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि कांग्रेस पार्टी लंबे समय तक देश की सत्ता में रही, लेकिन उसने दलितों और पिछड़े वर्गों के हितों के लिए गंभीर प्रयास नहीं किए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने दलित समाज के महान नेता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को लंबे समय तक उचित सम्मान नहीं दिया। उनके अनुसार, यह वही पार्टी है जिसने वर्षों तक सत्ता में रहते हुए भी उन्हें Bharat Ratna से सम्मानित नहीं किया।
मायावती ने कहा कि अगर कांग्रेस वास्तव में दलितों की हितैषी होती, तो वह उनके योगदान को समय रहते स्वीकार करती। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, जिससे दलित समाज में असंतोष पैदा हुआ।
बसपा की स्थापना का कारण
मायावती ने अपने बयान में कहा कि कांग्रेस की इसी मानसिकता के कारण बहुजन समाज पार्टी का जन्म हुआ। बसपा की स्थापना दलित, पिछड़े और वंचित समाज के अधिकारों के लिए की गई थी।
बसपा के संस्थापक Kanshi Ram का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने समाज के दबे-कुचले लोगों को राजनीतिक ताकत देने के लिए संघर्ष किया।
मायावती ने सवाल उठाया कि जब कांग्रेस ने बाबा साहेब अंबेडकर को समय पर सम्मान नहीं दिया,
तो वह अब कांशीराम जी को कैसे सम्मानित कर सकती है।
उनके अनुसार, कांग्रेस की नीतियों और बयानबाज़ी में अंतर दिखाई देता है।
बाबा साहेब अंबेडकर के सम्मान पर सवाल
मायावती ने कहा कि बाबा साहेब अंबेडकर सिर्फ दलित समाज के ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा हैं।
उन्होंने भारतीय संविधान की रचना कर देश को लोकतांत्रिक व्यवस्था दी।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने लंबे समय तक उनके योगदान को नजरअंदाज किया। मायावती का कहना है कि
दलित समाज इस इतिहास को अच्छी तरह जानता है और इसी कारण बसपा को समर्थन देता रहा है।
कांशीराम के सम्मान पर भी उठे सवाल
बसपा प्रमुख ने कहा कि कांशीराम ने अपना पूरा जीवन बहुजन समाज को संगठित करने में लगा दिया।
उन्होंने दलितों और वंचित वर्गों को राजनीतिक ताकत देने का काम किया।
मायावती ने कहा कि कांग्रेस अब उनके नाम पर राजनीति करने की कोशिश कर रही है, लेकिन
जब उनके योगदान को मान्यता देने की बात आती है तो वह पीछे हट जाती है।
उनके अनुसार, बसपा ही वह पार्टी है जिसने कांशीराम के विचारों और मिशन को आगे बढ़ाया है।
राजनीतिक असर और प्रतिक्रिया
मायावती के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की ओर से भी इस पर प्रतिक्रिया आने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान आगामी चुनावी रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है,
क्योंकि दलित वोट बैंक राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मायावती का यह बयान कांग्रेस और बसपा के बीच लंबे समय से चल रही राजनीतिक
प्रतिद्वंद्विता को फिर से सामने ले आया है। उन्होंने कांग्रेस पर दलित विरोधी
मानसिकता का आरोप लगाते हुए कहा कि इसी कारण बसपा का गठन करना पड़ा।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बयान पर कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दल
किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं और इसका आगामी राजनीतिक माहौल पर क्या असर पड़ता है।


