यूपी: बिना अनुमति के कॉरिडोर से हटाया गया था महानगर मेट्रो स्टेशन, 22 मेट्रो स्वीकृत थे, 21 का निर्माण हुआ – CAG रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताएं

लखनऊ मेट्रो फेज लखनऊ मेट्रो फेज

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मेट्रो परियोजना को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। कॉम्पट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) की रिपोर्ट में लखनऊ मेट्रो रेल प्रोजेक्ट (फेज-1ए) में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, स्वीकृत 22 स्टेशनों में से महानगर मेट्रो स्टेशन को बिना भारत सरकार की अनुमति के परियोजना से हटा दिया गया, जबकि यह स्टेशन यात्री क्षमता के आधार पर उच्च प्राथमिकता वाला था। साथ ही विवादित जमीन पर डिपो निर्माण, सुरक्षा प्रमाणपत्र का नवीनीकरण न होना और अन्य उल्लंघन भी उजागर हुए हैं।

CAG रिपोर्ट का मुख्य खुलासा

CAG की परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट (निर्माण और संचालन पर) में बताया गया है कि लखनऊ मेट्रो फेज-1ए में कुल 22 स्टेशन भारत सरकार से सैद्धांतिक स्वीकृति प्राप्त थे। डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) के अनुसार महानगर स्टेशन की दैनिक यात्री क्षमता बहुत अधिक थी – 2015 में तीसरे और 2020 में दूसरे स्थान पर था। लेकिन लखनऊ मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (LMRC) ने बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के इसे हटा दिया और केवल 21 स्टेशन बनाए। इससे DPR, MoU, वित्तीय समझौता और प्रोजेक्ट एग्रीमेंट का उल्लंघन हुआ।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि महानगर स्टेशन हटाने से यात्रियों को असुविधा हुई और परियोजना की प्रभावशीलता प्रभावित हुई।

अन्य प्रमुख अनियमितताएं

  • विवादित जमीन पर डिपो निर्माण: CAG ने पाया कि मेट्रो डिपो का कुछ हिस्सा विवादित भूमि पर बनाया गया, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
  • सुरक्षा प्रमाणपत्र का नवीनीकरण न होना: इंटरिम स्पीड सर्टिफिकेट का नवीनीकरण नहीं किया गया,
  • जिससे यात्रियों की सुरक्षा जोखिम में रही। मेट्रो 4 साल तक बिना रिन्यूअल के चली।
  • पटरियों की गुणवत्ता पर सवाल: IIT कानपुर की जांच में पटरियां कमजोर पाई गईं।
  • शोर स्तर निर्धारित सीमा से अधिक था।
  • वाणिज्यिक स्थान का उपयोग न होना: मार्च 2025 तक 54,196 वर्ग फीट वाणिज्यिक स्पेस का
  • कोई उपयोग नहीं हुआ, जबकि इसके लिए अधिकारी तैनात थे।
  • अन्य उल्लंघन: ग्राउंडवाटर निकासी के लिए NOC नहीं लिया गया, ठेकेदारों को अनियमित लाभ पहुंचाया गया।

परियोजना का प्रभाव और चिंताएं

लखनऊ मेट्रो फेज-1ए 22.88 किमी लंबा है, लेकिन स्टेशन हटाने और

अन्य कमियों से परियोजना की लागत-लाभ अनुपात प्रभावित हुआ। CAG ने सपा और भाजपा दोनों सरकारों पर सवाल उठाए हैं।

यात्रियों की सुरक्षा, वित्तीय प्रबंधन और नियमों का पालन न होने से जनता में असंतोष बढ़ा है।

निष्कर्ष और सुझाव

CAG रिपोर्ट एक चेतावनी है कि सार्वजनिक परियोजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।

LMRC को अब इन अनियमितताओं पर कार्रवाई करनी होगी।

महानगर स्टेशन जैसे महत्वपूर्ण स्टेशन को बहाल करने या वैकल्पिक व्यवस्था की मांग उठ रही है।

यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है, इसलिए स्पीड सर्टिफिकेट रिन्यूअल और अन्य सुधार तुरंत होने चाहिए।

लखनऊ मेट्रो को बेहतर बनाने के लिए सभी पक्षों को मिलकर काम करना होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *