भारत में सदियों से हिन्दू-मुस्लिम एकता और भाईचारे का पैगाम संगम के रूप में स्थापित है। गोरखपुर के जाफरा बाजार स्थित हजरत बाबा सैयद गाजी मोमिन शीश अली शाह रहमतुल्लाह अलैह की शीश महल दरगाह पर इसी तहजीब और श्रद्धा का एक अनूठा नजारा देखने को मिला। बेनीगंज की रहने वाली मोनी सोनकर ने अपनी बेटी की प्राप्ति की मन्नत पूरी होने पर दरगाह पर चादर और गागर अर्पित कर हिन्दू-मुस्लिम एकता की जीती-जागती मिसाल पेश की।
मन्नत पूरी होने पर भावुक पल
मोनी सोनकर ने कुछ वर्ष पहले बच्ची की प्राप्ति के लिए शीश महल दरगाह पर मन्नत मांगी थी। मुराद पूरी होने पर उन्होंने अपनी दोनों बेटियों रूसी और अनन्या को साथ लेकर दरगाह पहुंची। देर शाम तक यहां कव्वाली की महफिल जमी रही, जिसमें अकीदत और श्रद्धा से भरे भजन-कव्वालियां गूंजीं। मोनी सोनकर ने चादर और गागर चढ़ाकर बाबा का शुक्र अदा किया। उन्होंने कहा, “बाबा के दर से मेरी मुराद पूरी हुई है। मैं मन्नत की रस्म निभाने आई हूं। सच्चे मन से मांगी गई मुराद जरूर पूरी होती है क्योंकि अल्लाह, ईश्वर हर जगह मौजूद होते हैं। बाबा में अटूट श्रद्धा है, उनकी कृपा से ही बच्ची की प्राप्ति हुई है।”
दरगाह पर सम्मान और दुआएं
दरगाह के गद्दीनशीन/व्यवस्थापक सज्जाद अली रहमानी ने मोनी सोनकर को चादर भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले मोनी ने यहां बच्ची पाने की मुराद मांगी थी और आज मन्नत पूरी होने पर अकीदत के साथ चादर-गागर अर्पित कर रही हैं। यह गंगा-जमुनी तहजीब का बेहतरीन उदाहरण है। मौके पर अकीदतमंदों में शिरनी (प्रसाद) का वितरण किया गया। कव्वाली महफिल में मुल्क की हिफाजत, अमन-चैन और भाईचारे की दुआएं मांगी गईं।
मौजूद लोग और भावुक माहौल
इस मौके पर सामाजिक योद्धा मुर्तजा हुसैन रहमानी, अय्यूब अंसारी, अहद, अल्तमश के साथ ही
मोनी सोनकर की दोनों बेटियां रूसी और अनन्या, शिव देवी, सोनू,
रानी सोनकर, रोशन, जॉनी, उला, एंजल, पूजा, अनमोल सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
पूरा माहौल भावुक और श्रद्धापूर्ण था। लोग एक-दूसरे को गले लगाकर भाईचारे का संदेश दे रहे थे।
शीश महल दरगाह पर मोनी सोनकर के इस कदम ने
एक बार फिर साबित कर दिया कि भारत में धर्म की दीवारें नहीं,
बल्कि श्रद्धा और भाईचारे की डोर मजबूत है। हिन्दू परिवार द्वारा मुस्लिम दरगाह पर
मन्नत पूरी कर चादर-गागर चढ़ाना और कव्वाली महफिल में मुल्क की तरक्की की दुआ मांगना अनूठी मिसाल है।
यह घटना गोरखपुर और पूरे पूर्वांचल में सद्भावना का संदेश दे रही है।
ऐसे उदाहरण ही भारत की असली ताकत हैं


