गोरखपुर में रसोई गैस संकट: शहर से गांव तक हाहाकार
गोरखपुर में रसोई गैस की कमी ने आम नागरिकों के जीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। एलपीजी गैस की आपूर्ति में गिरावट के कारण लोग घंटों लाइन में खड़े रहते हैं और कई बार एजेंसियों पर हंगामा भी हो जाता है।
होटल और रेस्टोरेंट संचालकों की चिंता
कॉमर्शियल गैस सिलिंडर की कमी से होटल और रेस्टोरेंट संचालकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। गोरखपुर के होटल संचालक ध्रुव श्रीवास्तव का कहना है कि यदि आपूर्ति में और कमी आती है तो होटल संचालन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। कई बार रिफिलिंग की देरी के कारण किचन संचालन बाधित हो जाता है और ग्राहकों को समय पर भोजन उपलब्ध नहीं कराया जा पाता।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति
ग्रामीण इलाकों में भी गैस की कमी ने समस्याएं बढ़ा दी हैं। कई स्थानों पर सर्वर की खराबी के कारण गैस वितरण बाधित हो रहा है। कुछ जगहों पर सिलिंडर खत्म हो चुके हैं और लोग परेशान हैं। शादी-विवाह जैसे बड़े आयोजनों में रसोई गैस की कमी ने घरों में भी समस्या पैदा कर दी है।
नौसड़ एजेंसी पर हंगामा
मंगलवार को नौसड़ स्थित एक गैस एजेंसी पर उपभोक्ताओं का धैर्य जवाब दे गया। सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग सिलिंडर के इंतजार में खड़े रहे और गैस न मिलने पर उन्होंने हंगामा किया। एजेंसी कर्मियों ने लोगों को संभालने में काफी मेहनत करनी पड़ी। मोबाइल बुकिंग नंबर भी कई बार घंटों तक बाधित रहने से लोगों की परेशानी और बढ़ गई।
आपूर्ति की स्थिति
जानकारी के अनुसार, सामान्य दिनों में बाटलिंग प्लांट में दो शिफ्ट में करीब 50 हजार सिलिंडरों की रिफिलिंग होती है।
इसके लिए लगभग 32 एलपीजी टैंकर की आवश्यकता होती है।
लेकिन फिलहाल, गुजरात से केवल 10 से 12 टैंकर ही गोरखपुर पहुँच पा रहे हैं।
इस कमी के कारण पूरे शहर और गांवों में गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
एलपीजी आपूर्ति सुधार के सुझाव
विशेषज्ञों का कहना है कि आपूर्ति बढ़ाने के लिए ज्यादा टैंकरों का उपयोग किया जाना चाहिए।
इसके अलावा, एजेंसियों को ऑनलाइन और मोबाइल बुकिंग के लिए
बेहतर सिस्टम लागू करना चाहिए ताकि ग्राहकों को घंटों लाइन में न लगना पड़े।
गोरखपुर में रसोई गैस संकट ने शहर और गांवों दोनों में लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।
होटल, रेस्टोरेंट और घरों में रसोई संचालन प्रभावित हो रहा है। समय पर टैंकर आपूर्ति और
बेहतर वितरण प्रणाली के माध्यम से ही इस संकट को नियंत्रित किया जा सकता है


