गोरखपुर जिले के चौरी-चौरा क्षेत्र में स्थित ब्रह्मपुर में एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक क्रांति की शुरुआत होने जा रही है। श्री कृष्ण धर्म ट्रस्ट और ओबीसी पार्टी (वन भारत सिटीजन पार्टी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष काली शंकर यदुवंशी ने प्रेस वार्ता में घोषणा की कि यहां श्री यदुधाम पीठ स्थापित की जाएगी। यह भारत का पहला ऐसा पीठ होगा जहां महाराज यदु की विश्व की पहली प्रतिमा स्थापित होगी। साथ ही श्री राधा-कृष्ण और सहस्त्रबाहु अर्जुन (कार्तवीर्य अर्जुन) की भव्य प्रतिमाएं भी लगाई जाएंगी। यह परियोजना यदुवंशी, हैहयवंशी और संबंधित वंशों के लिए आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और वैचारिक केंद्र बनेगी। अगर आप “महाराज यदु प्रतिमा चौरी-चौरा” या “श्री यदुधाम पीठ गोरखपुर” सर्च कर रहे हैं, तो यह ब्लॉग आपको पूरी जानकारी देगा।
श्री यदुधाम पीठ का महत्व और विशेषताएं
महाराज यदु यदुवंश के आदि पुरुष और भगवान श्रीकृष्ण के पूर्वज हैं। काली शंकर यदुवंशी ने बताया कि आज तक विश्व में कहीं भी महाराज यदु की कोई प्रतिमा नहीं है। इस ऐतिहासिक उपेक्षा को दूर करने के लिए 11 फीट ऊंची स्वर्णमयी प्रतिमा ब्रह्मपुर में स्थापित की जाएगी। यह पीठ केवल यादव समाज के लिए नहीं, बल्कि जायसवाल (हैहयवंशी) और अन्य संबंधित वंशों की साझा वैदिक-ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक होगी।
पीठ के मुख्य उद्देश्य:
- यदुवंश के गौरवशाली इतिहास का शोध और प्रलेखन केंद्र
- युवाओं में आत्मगौरव, नेतृत्व और संगठन क्षमता जागृत करना
- विश्वभर के यदुवंशियों के लिए सांस्कृतिक एकीकरण का मंच
- अध्ययन, साधना और प्रेरणा का जीवंत केंद्र
प्रेस वार्ता में की गई महत्वपूर्ण घोषणाएं
स्थानीय प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में काली शंकर यदुवंशी ने श्री यदुधाम पीठ का कैलेंडर भी जारी किया। उन्होंने कहा कि यह अभियान एक अलौकिक स्वप्न से प्रेरित है, जिसमें महाराज यदु ने स्वयं प्रकट होकर समाज की सांस्कृतिक विस्मृति पर दुःख जताया। इसे उन्होंने दैवीय आदेश मानकर जीवन का प्रमुख संकल्प लिया है।
उन्होंने राजनीतिक दलों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि दशकों तक यादवों और पिछड़े वर्गों के नाम पर सत्ता का सुख भोगा गया, लेकिन आदि पूर्वज महाराज यदु को सम्मान दिलाने की कोई ठोस पहल नहीं हुई। अब यदुवंशी समाज केवल वोट बैंक नहीं रहेगा, बल्कि स्वाभिमानी, वैचारिक और सांस्कृतिक नेतृत्व खुद तय करेगा।
यदुवंशीता का सही अर्थ और संदेश
काली शंकर यदुवंशी ने स्पष्ट किया कि यदुवंशी होना किसी राजनीतिक दल का अनुयायी होना नहीं है। यह समता, साहस, सत्य और धर्मरक्षण की जीवंत परंपरा है।
राजनीतिक विचारधाराएं अस्थायी होती हैं, लेकिन यदुवंश की सामाजिक चेतना शाश्वत है।
किसी एक पार्टी से जुड़ना व्यक्तिगत अधिकार है,
लेकिन पूरे वंश को एक तराजू में तौलना अन्याय है।
आगामी चरण और अपील
आने वाले समय में भूमि पूजन, शिलान्यास, निर्माण योजना, जनसहयोग अभियान और
विश्वभर के यदुवंशी संगठनों के साथ समन्वय की रूपरेखा सार्वजनिक की जाएगी।
यह परियोजना यदुवंशियों के लिए नई ऊर्जा और गौरव का स्रोत बनेगी।
यह पहल न केवल सांस्कृतिक जागृति का प्रतीक है, बल्कि समाज में आत्मसम्मान और एकता की नई लहर भी लाएगी।

