गोरखपुर थाना खजनी की पावन धरती, जो अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है, ने भारतीय कुश्ती जगत को एक ऐसा रत्न दिया, जिसने अपने पराक्रम से देश-विदेश में जिले का नाम रोशन किया। हम बात कर रहे हैं ग्राम धाधूपार, खजनी के वीर योद्धा रामचंद्र यादव की, जिन्हें “उत्तर प्रदेश केसरी” के गौरवशाली खिताब से सम्मानित किया गया।
1970 और 1980 के दशक में रामचंद्र यादव ने अपनी अद्वितीय कुश्ती प्रतिभा से भारतीय दंगलों में खलबली मचा दी। उनकी उपलब्धियां केवल अखाड़े तक सीमित नहीं थीं, बल्कि उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का परचम लहराया। 1972 से 1980 तक, उन्होंने ऑल इंडिया रेलवे चैंपियनशिप में लगातार स्वर्ण पदक जीतकर एक ऐसा इतिहास रच दिया, जिसे आज भी श्रद्धा और गर्व से याद किया जाता है। महाराष्ट्र की मिट्टी से लेकर उत्तर भारत के अखाड़ों तक, उन्होंने अपनी अपराजेय कुश्ती कला से दर्शकों और प्रतिद्वंद्वियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
उत्तर प्रदेश केसरी खिताब और राष्ट्रीय पहचान
रामचंद्र यादव ने न केवल “उत्तर प्रदेश केसरी” का खिताब अर्जित किया, बल्कि अपने गांव, जिले और प्रदेश को राष्ट्रीय पहचान दिलाई। उनकी कुश्ती कला और संघर्षशीलता युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। उनकी विरासत केवल उनके पदकों और खिताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी स्मृतियां आज भी कुश्ती प्रेमियों के दिलों में जीवित हैं।
उनके परिवार द्वारा समय-समय पर आयोजित किए जाने वाले कुश्ती दंगल न केवल उनकी स्मृतियों को जीवंत रखते हैं, बल्कि ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच प्रदान कर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर भी देते हैं। ये दंगल ग्रामीण युवाओं को कुश्ती से जोड़ते हैं और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर जाने का रास्ता दिखाते हैं। रामचंद्र यादव ने दिखाया कि समर्पण, परिश्रम और अनुशासन से हर चुनौती को पार किया जा सकता है।
परिवार और समाज की ओर से कोटि-कोटि नमन
उनकी स्मृति में आज भी परिवार और समाज के लोग उन्हें याद करते हैं। राजेंद्र यादव (ऑपरेटर), जीतन यादव, शेषनाथ यादव, हरिश्चंद्र यादव, संतराज यादव (भाकियू राष्ट्रीयतावादी प्रदेश महासचिव), फूलचंद यादव, राम केवल यादव, वंश बहादुर सिंह (पूर्व भाजपा अध्यक्ष), इंद्रेश यादव इत्यादि हम सभी की ओर से उन्हें कोटि-कोटि नमन।
इन सभी ने उनकी उपलब्धियों को याद करते हुए कहा कि रामचंद्र यादव का जीवन एक जीती-जागती मिसाल है।
उन्होंने न केवल अखाड़े में जीत हासिल की, बल्कि नैतिकता,
अनुशासन और मेहनत का जो संदेश दिया, वह आज भी युवाओं के लिए प्रेरणादायक है।
खजनी और गोरखपुर के कुश्ती प्रेमी आज भी उनके नाम से
जुड़े दंगलों में भाग लेते हैं और उनकी याद में श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
प्रेरणा का स्तंभ बनी रहेगी विरासत
भारतीय कुश्ती के इस अनमोल रत्न को सादर नमन, जिनकी उपलब्धियां और
संघर्ष हमेशा इतिहास के पन्नों पर सुनहरे अक्षरों में अंकित रहेंगी।
उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्तंभ बनी रहेगी। ग्रामीण भारत में
जहां संसाधन सीमित होते हैं, वहां रामचंद्र यादव जैसे योद्धाओं ने साबित किया कि
इच्छाशक्ति और कड़ी मेहनत से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
आज जब कुश्ती खेल को ओलंपिक स्तर पर बढ़ावा दिया जा रहा है, तब रामचंद्र यादव
जैसी हस्तियों की कहानियां नए पहलवानों को प्रोत्साहित करती हैं।
खजनी की इस धरती ने न केवल एक कुश्तीगिर पैदा किया, बल्कि एक प्रेरणा स्रोत दिया जो
सदियों तक जीवित रहेगा।


