नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार ने ग्रामीण रोजगार की सबसे बड़ी योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) में ऐतिहासिक बदलाव किया है। 12 दिसंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में योजना का नाम बदलकर ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना’ करने को मंजूरी दे दी गई। साथ ही, हर परिवार को मिलने वाले गारंटीड रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है।
नाम बदलने की वजह क्या?
सरकारी सूत्रों के अनुसार, नया नाम ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना’ महात्मा गांधी की ग्रामीण स्वावलंबन और ग्राम स्वराज की विचारधारा को और मजबूत करने के लिए रखा गया है। योजना पहले 2005 में ‘राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ (नरेगा) के नाम से शुरू हुई थी। बाद में इसे महात्मा गांधी के नाम से जोड़ा गया। अब सरकार ने इसे ‘पूज्य बापू’ नाम देकर गांधीजी के प्रति सम्मान व्यक्त किया है। यह बदलाव योजना की पहचान को नई ऊर्जा देने का प्रयास है।
रोजगार के दिनों में बढ़ोतरी का फायदा
सबसे महत्वपूर्ण बदलाव रोजगार गारंटी में है। अब ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को सालाना कम से कम 125 दिन का अकुशल श्रम कार्य मिलेगा। पहले यह सीमा 100 दिन थी। इस बढ़ोतरी से ग्रामीण इलाकों में महंगाई और बेरोजगारी की चुनौतियों का सामना कर रहे लाखों परिवारों को अतिरिक्त आय का सहारा मिलेगा। कई राज्यों जैसे आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान लंबे समय से 100 दिन की सीमा बढ़ाने की मांग कर रहे थे।
कुछ रिपोर्ट्स में न्यूनतम मजदूरी को भी 240 रुपये प्रतिदिन करने का जिक्र है,
जिससे मजदूरों की कमाई में और इजाफा होगा। योजना के तहत सड़क निर्माण, तालाब खुदाई,
जल संरक्षण, बागवानी जैसे काम शामिल होते हैं, जो गांवों के विकास में भी योगदान देते हैं।
योजना का इतिहास और प्रभाव
मनरेगा दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजनाओं में से एक है।
यह ग्रामीण गरीबों को ‘काम का अधिकार’ प्रदान करती है।
पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं की भागीदारी 50% से ऊपर रही है, जो सशक्तिकरण का प्रतीक है।
वित्त वर्ष 2025-26 में योजना के लिए 86,000 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है


