महात्मा गांधी के अंतिम दिन: एक मज़ार की तीर्थ यात्रा आलेख: क़ुरबान अली (PART-2)

अपनी यात्रा के बाद गांधी जी ने लिखा: “अजमेर की दरगाह के बाद देश की यह दूसरी सबसे प्रतिष्ठित (क़ुतुबउद्दीन बख़्तियार काकी) दरगाह है, जहां हर साल न केवल मुसलमान, बल्कि हजारों ग़ैर-मुस्लिम भी ज़ियारत के लिए आते हैं.” दरगाह से जाने से पहले गांधी जी ने वहां मौजूद लोगों से कहा, “मैं यहां एक…

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महात्मा गांधी के अंतिम दिन: एक मज़ार की तीर्थ यात्रा आलेख: क़ुरबान अली (PART-1)

आज जब हर मस्जिद के नीचे मंदिर तलाश करने की साज़िश रची जा रही है, ऐसे में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की याद आती है कि वह आज होते, तो क्या करते.? आज़ाद हिंदुस्तान में मात्र साढ़े पांच माह जीवित रहने के दौरान उन्होंने क्या किया और हिंदू-मुस्लिम एकता और आपसी सौहार्द को बनाए रखने के…

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